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	<title>Newj9 Desk, Author at Newj9</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
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		<title>IPL 2026 Purple Cap: केकेआर की स्पिन तिकड़ी पर अकेले भारी पड़े नूर</title>
		<link>https://newj9.com/archives/152414</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9 Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:25:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एक ओर सुनील नारायण, वरुण चक्रवर्ती और अनुकूल राय की स्पिन तिकड़ी तो दूसरी ओर चेन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) के अफगानी स्पिनर नूर अहमद। चेन्नई के चेपक स्टेडियम की पिच जहां गेंद कुछ रुककर आ रही थी और बल्लेबाजों को शाट खेलने में परेशानी हो रही थी, वहां केकेआर की स्पिन तिकड़ी केवल दो विकेट ले &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">एक ओर सुनील नारायण, वरुण चक्रवर्ती और अनुकूल राय की स्पिन तिकड़ी तो दूसरी ओर चेन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) के अफगानी स्पिनर नूर अहमद। चेन्नई के चेपक स्टेडियम की पिच जहां गेंद कुछ रुककर आ रही थी और बल्लेबाजों को शाट खेलने में परेशानी हो रही थी, वहां केकेआर की स्पिन तिकड़ी केवल दो विकेट ले पाई तो उसी पिच पर नूर ने अपने चार ओवर में केवल 18 रन खर्च करते हुए तीन बल्लेबाजों को आउट किया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">Noor Ahmad बने CSK के रियल हीरो&nbsp;</h3>



<p class="wp-block-paragraph">नूर ने केकेआर के कप्तान अंजिक्य रहाणे (28), कैमरन ग्रीन (00) और रिंकू सिंह (06) को आउट कर मैच को सीएसके के पक्ष में झुका दिया। चेन्नई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए कोलकाता को 193 रन का लक्ष्य दिया था, जिसके जवाब में रहाणे की कप्तानी वाली टीम 160 रन ही बना सकी। सीएसके ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की, वहीं कोलकाता की यह चौथी हार है। इसके साथ ही 2026 सत्र में कोलकाता का पहली जीत का इंतजार और बढ़ गया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नूर ने कोलकाता नाइटराइडर्स को किया ‘बेनूर’</h3>



<p class="wp-block-paragraph">लक्ष्य का पीछा करने उतरी कोलकाता ने इस बार रणनीति में बदलाव करते हुए फिन एलन के साथ सुनील नारायण से ओपनिंग कराई, लेकिन उसका यह दांव भी नहीं चला। फिन और नारायण टीम को तेज शुरुआत नहीं दिला सके और पावरप्ले में ही लौट गई। इसके बाद रहाणे और अंगकृष रघुवंशी के बीच 50 रन की साझेदार हुई, लेकिन अकील हुसैन ने 10वें ओवर में रघुवंशी को आउट कर केकेआर को तीसरा झटका दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके बाद सीएसके के कप्तान रुतुराज ने नूर को गेंद सौंपी और उन्होंने अपने पहले ही ओवर की अंतिम दो गेंद पर रहाणे और ग्रीन को आउट कर मैच का रुख पलट दिया। पहले उन्होंने रहाणे को एक्स्ट्रा कवर पर खड़े रुतुराज के हाथों कैच कराया। रहाणे आइपीएल में नूर का 50वां शिकार बने।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगली गेंद पर नूर ने आइपीएल के सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ी ग्रीन को बोल्ड किया। अपना दूसरे ओवर में नूर ने पहली चार गेंद पर रिंकू को कोई रन नहीं दिया और इससे बने दबाव में रिंकू बड़ा शाट खेलने की कोशिश में आउट हो गए। यहीं से मैच केकेआर के हाथ से निकल गया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">संजू-ब्रेविस ने संभाली पारी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं, चेन्नई की शुरुआत काफी तेज रही और संजू सैमसन व युवा बल्लेबाज आयुष म्हात्रे ने पावरप्ले में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए टीम को छह ओवर में ही 72 रन तक पहुंचा दिया था। म्हात्रे ने 17 गेंदों में 38 रन बनाते हुए लगातार दो छक्के जड़े और एक शानदार ‘नटराज शाट’ खेलकर दर्शकों का दिल जीत लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं सैमसन ने 32 गेंदों में 48 रन की पारी खेलकर पारी को संभाले रखा। हालांकि, पावरप्ले के बाद मैच पूरी तरह बदल गया। नारायण, अनुकूल और वरुण चक्रवर्ती ने मिलकर चेन्नई के रन रेट पर ब्रेक लगा दिया। तीनों स्पिनरों ने मिलकर 10 ओवर में सिर्फ 68 रन दिए। चेन्नई की टीम पावरप्ले के बाद के 14 ओवरों में सिर्फ 120 रन ही जोड़ सकी। मध्यध्यक्रम में डेवाल्ड ब्रेविस ने 29 गेंदों में 41 रन बनाकर कुछ अच्छे शाट्स लगाए और अपनी प्रतिभा की झलक दिखाई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं सरफराज खान ने 23 रन की पारी खेलते हुए चतुर बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। दोनों के बीच अर्धशतकीय साझेदारी हुई, लेकिन वे टीम को बड़े स्कोर तक नहीं ले जा सके। अंत के ओवरों में तेज गेंदबाज कार्तिक त्यागी ने शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने 140 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार से गेंदबाजी करते हुए बल्लेबाजों को परेशान किया और चार ओवर में 35 रन देकर दो विकेट झटके।</p>



<h3 class="wp-block-heading">फिर खामोश रहा कप्तान ऋतुराज का बल्ला</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सीएसके के लिए उसके कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ का रन नहीं बनाना अब बड़ी चिंता बन चुका है। एक बार फिर रुतुराज दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर सके। इस सीजन में अब तक पांच मैचों में वह दो बार ही दहाई के आंकड़े में पहुंच सके हैं। कोलकाता नाइटराइडर्स के विरुद्ध भी वह संघर्ष करते दिखे और केवल सात रन बनाकर आउट हुए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">IPL 2026 Purple Cap List</h3>



<p class="wp-block-paragraph">आईपीएल 2026 के 22 मैच खेले जा चुके है और पर्पल कैप की बात करें तो गुजरात टाइटंस के प्रसिद्ध कृष्णा के सिर पर्पल कैप सजी हुई हैं। प्रसिद्ध ने 4 मैच खेलते हुए अब तक 10 विकेट ले लिए हैं। इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर सीएसके के अंशुल कंबोज है, जिन्होंने भी 10 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान उनका इकोनमी रेट 10.12 का रहा, जबति प्रसिद्ध बेहतर इकोनमी रेट की वजह से नंबर-1 पर है। वहीं, सीएसके के नूर अहमद ने 4 मैच खेलते हुए 5 विकेट लिए हैं और वो 29वें पायदान पर विराजमान है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर बात करें ऑरेंज कैप की तो वो मौजूदा समय में सनराइजर्स हैदराबाद के हेनरिक क्लासेन के पास है, जिन्होंने 5 मैच में कुल 224 रन बनाए हैं। ऑरेंज कैप की लिस्ट में दूसरे स्थान पर ईशान किशन है, जिन्होंने 213 रन बना लिए हैं। वैभव सूर्यवंशी तीसरे पायदान पर 200 रन के साथ मौजूद है।</p>
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		<title>होर्मुज की नाकेबंदी से अमेरिका दोहराने जा रहा 60 साल पुरानी ब्रिटिश भूल</title>
		<link>https://newj9.com/archives/152411</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9 Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:18:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का फैसला सिर्फ एक सैन्य कदम नहीं, बल्कि एक जटिल क्षेत्रीय ताने-बाने को नजरअंदाज करने वाला जोखिम भरा दांव माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल तेल आपूर्ति या समुद्री मार्गों तक सीमित नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और स्थानीय पहचान की गहरी परतों से &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का फैसला सिर्फ एक सैन्य कदम नहीं, बल्कि एक जटिल क्षेत्रीय ताने-बाने को नजरअंदाज करने वाला जोखिम भरा दांव माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल तेल आपूर्ति या समुद्री मार्गों तक सीमित नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और स्थानीय पहचान की गहरी परतों से जुड़ा है, जिसे समझे बिना कोई भी बाहरी शक्ति सफल नहीं हो सकती।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>विशेषज्ञ इस पूरे घटनाक्रम की तुलना 1956 के स्वेज संकट से कर रहे हैं, जब ब्रिटेन बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय हालात को समझने में नाकाम रहा था। उसने मिस्त्र पर सैन्य दबाव बनाकर नहर पर नियंत्रण बनाए रखना चाहा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विरोध और अमेरिका-सोवियत दबाव के आगे झुकना पड़ा, जिससे उसके वैश्विक प्रभुत्व के अंत की शुरुआत हुई।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">करीब 40 दिनों तक चले अमेरिका-इजरायल और ईरान के टकराव के बाद शांति वार्ता टूटने के तुरंत बाद होर्मुज की नाकेबंदी का फैसला सामने आया है। ऐसे में होर्मुज, जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धमनी माना जाता है, अब एक बड़े भू-राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तेल राजतंत्रों की जड़ें और पश्चिमी रणनीति की विरासत</h3>



<p class="wp-block-paragraph">होर्मुज पर नियंत्रण की लड़ाई नई नहीं है। 17वीं सदी में पुर्तगालियों के बाद ब्रिटेन ने यहां अपना प्रभुत्व स्थापित किया और स्थानीय कबीलों व शेखों को साथ लेकर समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाया। यही प्रक्रिया आगे चलकर खाड़ी के आधुनिक तेल राजतंत्रों – यूएई, कतर, बहरीन और कुवैत- की नींव बनी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1971 के बाद जब अमेरिका ने ब्रिटेन की जगह ली, तो उसने भी इन्हीं शासक परिवारों पर भरोसा बनाए रखा। लेकिन इस दौरान क्षेत्र की जटिल सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं को काफी हद तक नजरअंदाज किया गया- जो आज की अस्थिरता की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">दिखने वाली एकता के पीछे छिपी विविधता</h3>



<p class="wp-block-paragraph">खाड़ी क्षेत्र को अक्सर अरब-सुन्नी और ईरानी-शिया पहचान के आधार पर देखा जाता है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है। ईरान के उत्तरी तट पर अरब और बलूच समुदाय रहते हैं, जिनके तेहरान के साथ संबंध हमेशा सहज नहीं रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप जैसे इलाकों में कुमजारी भाषा बोलने वाले समुदाय हैं, जिनकी पहचान समुद्र से गहराई से जुड़ी है और जो खुद को पारंपरिक राष्ट्रीय सीमाओं से अलग महसूस करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इन समुदायों की यही अलग पहचान मौजूदा संकट में निर्णायक भूमिका निभा सकती है- खासतौर पर तब, जब राज्य की पकड़ कमजोर होती दिख रही हो।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ईरान कमजोर हुआ तो उभरेंगे स्थानीय समूह</h3>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल और अमेरिका के लगातार दबाव के बीच ईरान की केंद्रीय सत्ता कमजोर हुई है और शक्ति का केंद्रीकरण आईआरजीसी (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर) के सीमित दायरे में सिमटता जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसे हालात में होर्मुज के आसपास रहने वाले विभिन्न जातीय और क्षेत्रीय समूह अधिक मुखर हो सकते हैं, जिससे स्थिति और जटिल होने की आशंका है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ओमान-यूएई तनाव और नया सामरिक खतरा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">संकट का एक और अहम पहलू खाड़ी देशों के आपसी मतभेद हैं। जहां यूएई ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं ओमान पारंपरिक रूप से संतुलित और मध्यस्थ की भूमिका में रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रिपोर्टों में यह भी संकेत मिला है कि होर्मुज में संभावित टोल सिस्टम को लेकर ओमान और ईरान के बीच चर्चा हुई, हालांकि मस्कट ने इससे इन्कार किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुसंदम प्रायद्वीप, जो रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, को लेकर यूएई और ओमान के बीच तनाव की संभावना भी जताई जा रही है। स्थानीय पहचान की राजनीति का इस्तेमाल कर इस क्षेत्र पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें भविष्य में बड़े टकराव का कारण बन सकती हैं।</p>
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		<item>
		<title>चीन ने विदेशी कंपनियों पर कसा शिकंजा</title>
		<link>https://newj9.com/archives/152408</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9 Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:12:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>तैयार माल की अधिकता से जूझ रहे चीन ने विदेशी कंपनियों के कामकाज से संबंधित नियम कड़े किए हैं। ऐसा चीन के आधारभूत ढांचे का लाभ लेते हुए विदेशी कंपनियों को उत्पादन करने और तैयार माल को निर्यात करने से रोकने की मंशा है। नए नियमों में विदेशी कंपनियों को चीनी कंपनियों का स्वरूप देकर &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">तैयार माल की अधिकता से जूझ रहे चीन ने विदेशी कंपनियों के कामकाज से संबंधित नियम कड़े किए हैं। ऐसा चीन के आधारभूत ढांचे का लाभ लेते हुए विदेशी कंपनियों को उत्पादन करने और तैयार माल को निर्यात करने से रोकने की मंशा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नए नियमों में विदेशी कंपनियों को चीनी कंपनियों का स्वरूप देकर कार्य करने और चीन की कंपनियों के साथ गठजोड़ करने के नियम भी कड़े किए गए हैं। इन नए नियमों पर प्रधानमंत्री ली कछियांग ने सात अप्रैल को हस्ताक्षर किए हैं। नए नियम चीन में लागू हो गए हैं। चीन के सामान का सरप्लस स्टाक पूरे विश्व के लिए समस्या बन गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यूक्रेन युद्ध के चलते पहले से धीमी आर्थिक तरक्की की रफ्तार को ईरान युद्ध ने लगभग ठप कर दिया है। ऐसे में विश्व के सबसे बड़े निर्यातक देश चीन के तैयार माल की खपत घटी है और चीन के गोदाम, बंदरगाह और उपभोक्ता देशों के भंडार गृह चीनी माल से भर गए हैं। इससे विश्व स्तर पर चिंता पैदा हो गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विदेशी कंपनियों के लिए चीन के नए नियम इसी समस्या से निपटने के लिए हैं। पिछले वित्त वर्ष में चीन का कुल निर्यात 10 खरब डालर के आंकड़े को पार कर गया था। लेकिन ताजा वर्ष की पहली तिमाही में चीनी माल की बिक्री और खपत धीमी पड़ गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे चीनी कारखानों में उत्पादन कम करना पड़ा है और वहां पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी का खतरा पैदा हो गया है। इन स्थितियों से निपटने के लिए चीन ने 18 बिंदुओं वाले नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उल्लंघन करने वाली विदेशी कंपनियों और उनका सहयोग करने वाली चीनी कंपनियों के लिए कड़े दंड का प्रविधान किया गया है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>वेदांता पावर प्लांट हादसे में मृतकों के परिजनों को 35 लाख और घायलों को 15 लाख देने का एलान</title>
		<link>https://newj9.com/archives/152405</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9 Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:08:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में मौजूद वेदांता पावर प्लांट हादसे में कंपनी ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा की है।&#160;जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, गंभीर रूप से घायलों को 15 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में मौजूद वेदांता पावर प्लांट हादसे में कंपनी ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा की है।&nbsp;जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, गंभीर रूप से घायलों को 15 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा मृतकों के परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने का भी आश्वासन दिया गया है। इस घोषणा के बाद प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि स्थानीय लोग घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मालूम हो कि मंगलवार को पावर प्लांट में एक भीषण बायलर ब्लास्ट हुआ था।</p>



<h2 class="wp-block-heading">हादसे के समय प्लांट में करीब 50 लोग मौजूद थे</h2>



<p class="wp-block-paragraph">जिसमें 14 मजदूरों की जान चली गई थी। इस भयावह हादसे में 32 मजदूर घायल भी हुए हैं, जिनमें से 6 जिंदगी और मौत के बीच वेंटिलेटर पर जंग लड़ रहे हैं। हादसे के समय प्लांट में करीब 50 मजदूर मौजूद थे। वहीं, हादसे के बाद वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने X पर पोस्ट करके अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। उन्होंने इस घटना पर दुख जताते हुए इसे व्यक्तिगत क्षति बताया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जहां एक तरफ चेयरमैन इसे परिवार का दुख बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के महासचिव कन्हैया अग्रवाल ने इसे सीधे तौर पर प्रबंधन की लापरवाही करार दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो प्लांट में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखा गया था। इसके साथ ही ब्लास्ट इतना जोरदार था कि मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सक्ती के वेदांता प्लांट में बनती है बिजली</h2>



<p class="wp-block-paragraph">सक्ती जिले में मौजूद वेदांता पावर प्लांट में मुख्य रूप से बिजली उत्पादन का काम किया जाता है। इस प्लांट में कोयले का इस्तेमाल करके बिजली बनाई जाती है, जिसका उपयोग आसपास के औद्योगिक क्षेत्र और ग्रिड सप्लाई में होता है। प्लांट में कोयले की प्रोसेसिंग, बॉयलर संचालन और टर्बाइन के जरिए बिजली उत्पादन की प्रक्रिया चलती है।</p>
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		<item>
		<title>2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाएगा भारत</title>
		<link>https://newj9.com/archives/152402</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9 Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:05:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने भारत के महत्वाकांक्षी स्पेस स्टेशन प्रोजेक्ट ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ के निर्माण में रूस के साथ साझेदारी की इच्छा जताई है। इसरो के वरिष्ठ अधिकारी ने मॉस्को में आयोजित एक अंतरिक्ष मंच पर यह जानकारी दी। इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स के निदेशक ए. पकीराज ने कहा कि BAS के विकास में रूस &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने भारत के महत्वाकांक्षी स्पेस स्टेशन प्रोजेक्ट ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ के निर्माण में रूस के साथ साझेदारी की इच्छा जताई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो के वरिष्ठ अधिकारी ने मॉस्को में आयोजित एक अंतरिक्ष मंच पर यह जानकारी दी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स के निदेशक ए. पकीराज ने कहा कि BAS के विकास में रूस के अनुभव का लाभ उठाने के लिए भारत सहयोग चाहता है। उन्होंने कहा कि कंट्रोल सिस्टम, पावर सप्लाई, कम्युनिकेशन और ट्रैकिंग जैसे महत्वपूर्ण सब-सिस्टम में दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2035 तक तैयार होगा भारत का स्पेस स्टेशन<br></strong>इसरो के मुताबिक, भारत का प्रस्तावित स्पेस स्टेशन 2035 तक तैयर होगा और पृथ्वी से करीब 450 किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा और इसका झुकाव 51.6 डिग्री होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह रूसी स्पेस स्टेशन आरओएस के समान होगा। भारत अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ भी सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ISS के बाद नए अवसर<br></strong>मौजूदा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को 2030-31 तक डीकमीशन किए जाने की योजना है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर नए स्पेस स्टेशनों के निर्माण और सहयोग के अवसर बढ़ रहे हैं। फिलहाल चीन के पास ही एक सक्रिय मानवयुक्त स्पेस स्टेशन है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रूस की तकनीकी मदद अहम<br></strong>रूस, भारत को ऑर्बिटल मॉड्यूल, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, और डॉकिंग सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग दे सकता है। रूस के पास ‘Mir’ स्पेस स्टेशन और ISS के रूसी हिस्से ‘रशियन ऑर्विटल सेग्मेंट’ का व्यापक अनुभव है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दशकों पुराना अंतरिक्ष सहयोग<br></strong>भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष सहयोग का लंबा इतिहास रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1984 में राकेश शर्मा को अंतरिक्ष में भेजने में सोवियत संघ (अब रूस) ने मदद की थी।<br>1975 में भारत के पहले उपग्रह आर्यभट का प्रक्षेपण भी सोवियत संघ से हुआ था।<br>क्रायोजेनिक इंजन तकनीक और गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण में भी रूस ने अहम भूमिका निभाई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत और रूस की यह साझेदारी दोनों देशों के ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक संबंध’ का मजबूत आधार रही है। अब BAS प्रोजेक्ट के जरिए यह सहयोग अंतरिक्ष में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।</p>
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