<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>सेहत Archives - Newj9</title>
	<atom:link href="https://newj9.com/archives/category/%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a4/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://newj9.com/archives/category/सेहत</link>
	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
	<lastBuildDate>Mon, 08 Jun 2026 09:48:38 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.1</generator>
	<item>
		<title>क्या दाल-रोटी और चावल एक साथ खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है? जानिए एक्सपर्ट की राय</title>
		<link>https://newj9.com/archives/154969</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 09:48:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[Health]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newj9.com/?p=154969</guid>

					<description><![CDATA[<p>Health News: भारत में दाल, रोटी और चावल को संतुलित भोजन का हिस्सा माना जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस परंपरागत “इंडियन थाली” के कुछ पहलुओं को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। खासकर डायबिटीज और मोटापे के बढ़ते मामलों को देखते हुए खानपान की आदतों पर सवाल उठने &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://newj9.com/archives/154969">क्या दाल-रोटी और चावल एक साथ खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है? जानिए एक्सपर्ट की राय</a> appeared first on <a href="https://newj9.com">Newj9</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Health News:</strong> भारत में दाल, रोटी और चावल को संतुलित भोजन का हिस्सा माना जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस परंपरागत “इंडियन थाली” के कुछ पहलुओं को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। खासकर डायबिटीज और मोटापे के बढ़ते मामलों को देखते हुए खानपान की आदतों पर सवाल उठने लगे हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या भारतीय थाली से बढ़ता है डायबिटीज का खतरा?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों के अनुसार समस्या किसी एक खाद्य पदार्थ में नहीं, बल्कि पूरी थाली के असंतुलन में है। एक ही भोजन में चावल, रोटी, आलू, मिठाई और मीठे पेय शामिल होने से शरीर पर कार्बोहाइड्रेट का भार बढ़ जाता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीके बिरला हॉस्पिटल, जयपुर की सीनियर डाइटिशियन Divya Jain के अनुसार दाल, रोटी या चावल नुकसानदायक नहीं हैं, लेकिन इन्हें गलत मात्रा और गलत संयोजन में खाना समस्या पैदा कर सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">असंतुलित थाली बन सकती है वजह</h2>



<p class="wp-block-paragraph">एक सामान्य भारतीय भोजन में अक्सर कई प्रकार के कार्बोहाइड्रेट एक साथ शामिल हो जाते हैं। जैसे—</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>रोटी + चावल</li>



<li>आलू की सब्जी</li>



<li>मिठाई या मीठे पेय</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">इससे शरीर में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ सकता है, खासकर उन लोगों में जो पहले से प्रीडायबिटीज, डायबिटीज, मोटापा या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">प्रोटीन और फाइबर की कमी बड़ी समस्या</h2>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों का कहना है कि आज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि थाली में कार्बोहाइड्रेट अधिक और प्रोटीन-फाइबर कम होता है। लोग अक्सर दो-तीन रोटियों के साथ चावल भी खाते हैं, लेकिन दाल, पनीर, अंडा, चिकन या सब्जियों को पर्याप्त महत्व नहीं देते।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आधुनिक लाइफस्टाइल ने बढ़ाई परेशानी</h2>



<p class="wp-block-paragraph">पहले की तुलना में आज शारीरिक गतिविधि कम हो गई है। लंबे समय तक बैठकर काम करना और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन स्वास्थ्य जोखिम को और बढ़ा रहा है। ऐसे में शरीर अतिरिक्त कैलोरी को ठीक से खर्च नहीं कर पाता।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कैसी होनी चाहिए संतुलित थाली?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">एक्सपर्ट्स के अनुसार स्वस्थ भोजन के लिए थाली को इस तरह संतुलित करना चाहिए—</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>50% प्लेट:</strong> सब्जियां और सलाद</li>



<li><strong>25% प्लेट:</strong> प्रोटीन (दाल, पनीर, अंडा, चिकन, मछली, दही)</li>



<li><strong>25% प्लेट:</strong> रोटी या चावल</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading">क्या रोटी और चावल छोड़ना जरूरी है?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि रोटी या चावल छोड़ने की जरूरत नहीं है। समस्या उन्हें छोड़ने में नहीं, बल्कि <strong>अत्यधिक मात्रा और असंतुलित संयोजन</strong> में है। संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि से डायबिटीज का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h2>



<p class="wp-block-paragraph">इंडियन थाली पूरी तरह से खराब नहीं है, लेकिन बदलती लाइफस्टाइल के अनुसार उसमें संतुलन जरूरी है। सही मात्रा और सही संयोजन ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।</p>
<p>The post <a href="https://newj9.com/archives/154969">क्या दाल-रोटी और चावल एक साथ खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है? जानिए एक्सपर्ट की राय</a> appeared first on <a href="https://newj9.com">Newj9</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>माइग्रेन केवल सिरदर्द नहीं, हो सकता है दिल की सेहत से जुड़ा संकेत</title>
		<link>https://newj9.com/archives/154869</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 06:23:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[Migraine]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newj9.com/?p=154869</guid>

					<description><![CDATA[<p>माइग्रेन को आमतौर पर तेज सिरदर्द की समस्या माना जाता है, लेकिन हाल के शोध बताते हैं कि यह केवल सिरदर्द तक सीमित नहीं हो सकता। माइग्रेन शरीर की कई अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से भी जुड़ा हो सकता है, जिनमें दिल की सेहत भी शामिल है। Migraine पर हाल ही में The Journal of Headache &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://newj9.com/archives/154869">माइग्रेन केवल सिरदर्द नहीं, हो सकता है दिल की सेहत से जुड़ा संकेत</a> appeared first on <a href="https://newj9.com">Newj9</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">माइग्रेन को आमतौर पर तेज सिरदर्द की समस्या माना जाता है, लेकिन हाल के शोध बताते हैं कि यह केवल सिरदर्द तक सीमित नहीं हो सकता। माइग्रेन शरीर की कई अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से भी जुड़ा हो सकता है, जिनमें दिल की सेहत भी शामिल है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">Migraine पर हाल ही में The Journal of Headache and Pain में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, बार-बार माइग्रेन से पीड़ित लोगों में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, शोध यह स्पष्ट करता है कि माइग्रेन सीधे तौर पर हार्ट डिजीज का कारण नहीं है, बल्कि दोनों के बीच एक संभावित संबंध देखा गया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">स्टडी में क्या पाया गया</h2>



<p class="wp-block-paragraph">रिसर्च में पाया गया कि माइग्रेन से पीड़ित लोगों में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज, कोरोनरी हार्ट डिजीज और इस्केमिक स्ट्रोक का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेष रूप से 45 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में यह संबंध अधिक मजबूत पाया गया। इसके अलावा, जिन लोगों में माइग्रेन के साथ धूम्रपान, मोटापा या हाई ब्लड प्रेशर जैसे जोखिम कारक मौजूद थे, उनमें हार्ट डिजीज का खतरा और बढ़ गया।</p>



<h2 class="wp-block-heading">माइग्रेन के सामान्य लक्षण</h2>



<p class="wp-block-paragraph">माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द नहीं है, इसमें कई अन्य लक्षण भी शामिल हो सकते हैं जैसे मतली, उल्टी, रोशनी या तेज आवाज के प्रति संवेदनशीलता और सिर के एक हिस्से में तेज दर्द। यह समस्या व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन और कामकाज को प्रभावित कर सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कब हो सकता है माइग्रेन खतरनाक</h2>



<p class="wp-block-paragraph">अगर सिरदर्द अचानक बहुत तेज हो जाए, पैटर्न बदल जाए, बार-बार होने लगे या इसके साथ बोलने में परेशानी, शरीर में कमजोरी, चक्कर आना, धुंधला दिखना या बेहोशी जैसे लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर माइग्रेन के दौरे रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें या दवाओं से राहत न मिले तो भी मेडिकल सलाह लेना जरूरी है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">माइग्रेन से बचाव और सावधानियां</h2>



<p class="wp-block-paragraph">माइग्रेन से राहत के लिए नियमित नींद, तनाव नियंत्रण और संतुलित दिनचर्या जरूरी है। ट्रिगर करने वाले कारणों जैसे कुछ खाद्य पदार्थ, तेज रोशनी या नींद की कमी से बचना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पर्याप्त पानी पीना, हेल्दी डाइट लेना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज करना जरूरी है। लगातार समस्या होने पर विशेषज्ञ से जांच कराना सबसे सही कदम है।</p>
<p>The post <a href="https://newj9.com/archives/154869">माइग्रेन केवल सिरदर्द नहीं, हो सकता है दिल की सेहत से जुड़ा संकेत</a> appeared first on <a href="https://newj9.com">Newj9</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पुरुषों में पेट की चर्बी क्यों बढ़ती है? जानिए हार्मोनल बदलाव और इसके संकेत</title>
		<link>https://newj9.com/archives/154823</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 07:33:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[belly fat]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newj9.com/?p=154823</guid>

					<description><![CDATA[<p>पुरुषों में पेट के आसपास चर्बी बढ़ना आजकल एक आम समस्या बन गई है। अक्सर इसे केवल ज्यादा खाने, कम शारीरिक गतिविधि या बढ़ते वजन का परिणाम माना जाता है, लेकिन कई मामलों में इसके पीछे शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी एक बड़ा कारण हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हार्मोन शरीर के &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://newj9.com/archives/154823">पुरुषों में पेट की चर्बी क्यों बढ़ती है? जानिए हार्मोनल बदलाव और इसके संकेत</a> appeared first on <a href="https://newj9.com">Newj9</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पुरुषों में पेट के आसपास चर्बी बढ़ना आजकल एक आम समस्या बन गई है। अक्सर इसे केवल ज्यादा खाने, कम शारीरिक गतिविधि या बढ़ते वजन का परिणाम माना जाता है, लेकिन कई मामलों में इसके पीछे शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी एक बड़ा कारण हो सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों के अनुसार, हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, फैट स्टोरेज और ऊर्जा संतुलन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो शरीर में चर्बी जमा होने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">टेस्टोस्टेरोन की कमी से बढ़ सकता है पेट</h2>



<p class="wp-block-paragraph">नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम होने पर पेट के आसपास फैट जमा होने की संभावना बढ़ सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">टेस्टोस्टेरोन पुरुषों में मांसपेशियों के विकास, फैट बर्निंग और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है। इसका स्तर गिरने पर शरीर में पेट के आसपास चर्बी जमा होने लगती है और वजन बढ़ सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अन्य हार्मोन भी हैं जिम्मेदार</h2>



<p class="wp-block-paragraph">टेस्टोस्टेरोन के अलावा इंसुलिन, कोर्टिसोल और थायरॉयड हार्मोन भी शरीर के वजन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>इंसुलिन असंतुलन से शरीर में फैट स्टोरेज बढ़ सकता है</li>



<li>कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) बढ़ने पर पेट की चर्बी तेजी से जमा हो सकती है</li>



<li>थायरॉयड हार्मोन की गड़बड़ी से मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading">किन संकेतों को न करें नजरअंदाज?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">अगर पेट बढ़ने के साथ-साथ ये लक्षण भी दिखाई दें, तो यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>लगातार थकान महसूस होना</li>



<li>ऊर्जा की कमी</li>



<li>मांसपेशियों में कमजोरी</li>



<li>नींद की समस्या</li>



<li>मूड में बदलाव</li>



<li>यौन इच्छा में कमी</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि ये लक्षण केवल हार्मोन की वजह से ही हों, यह जरूरी नहीं है। इसलिए लंबे समय तक ऐसे लक्षण बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कैसे बनाए रखें हार्मोनल संतुलन?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान लाइफस्टाइल बदलावों से हार्मोनल संतुलन और वजन दोनों को नियंत्रित किया जा सकता है:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>नियमित व्यायाम और वॉक करें</li>



<li>संतुलित और पौष्टिक आहार लें</li>



<li>पर्याप्त नींद लें</li>



<li>तनाव को नियंत्रित करें</li>



<li>समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h2>



<p class="wp-block-paragraph">पुरुषों में पेट की चर्बी बढ़ना सिर्फ खानपान या लाइफस्टाइल की समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन भी एक अहम कारण हो सकता है। सही समय पर लक्षणों को पहचानकर और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।</p>
<p>The post <a href="https://newj9.com/archives/154823">पुरुषों में पेट की चर्बी क्यों बढ़ती है? जानिए हार्मोनल बदलाव और इसके संकेत</a> appeared first on <a href="https://newj9.com">Newj9</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ज्यादा पसीना आना सामान्य नहीं भी हो सकता है, जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव के तरीके</title>
		<link>https://newj9.com/archives/154782</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 11:15:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[ज्यादा पसीना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newj9.com/?p=154782</guid>

					<description><![CDATA[<p>पसीना आना शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करती है। गर्म मौसम, शारीरिक गतिविधि या तनाव जैसी स्थितियों में पसीना आना सामान्य माना जाता है। लेकिन कुछ लोगों को बिना किसी मेहनत या सामान्य परिस्थितियों में भी अत्यधिक पसीना आने की समस्या होती है, जिसे नजरअंदाज &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://newj9.com/archives/154782">ज्यादा पसीना आना सामान्य नहीं भी हो सकता है, जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव के तरीके</a> appeared first on <a href="https://newj9.com">Newj9</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पसीना आना शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करती है। गर्म मौसम, शारीरिक गतिविधि या तनाव जैसी स्थितियों में पसीना आना सामान्य माना जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लेकिन कुछ लोगों को बिना किसी मेहनत या सामान्य परिस्थितियों में भी अत्यधिक पसीना आने की समस्या होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यह स्थिति कई बार दैनिक जीवन, कामकाज और आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">शरीर के किन हिस्सों में हो सकती है ज्यादा पसीने की समस्या?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">अत्यधिक पसीना आने की समस्या शरीर के अलग-अलग हिस्सों में देखी जा सकती है, जैसे:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>हथेलियों में अधिक पसीना</li>



<li>पैरों में पसीना</li>



<li>चेहरे पर अत्यधिक पसीना</li>



<li>पूरे शरीर में असामान्य पसीना</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसे लक्षणों के पीछे केवल मौसम ही नहीं, बल्कि कई स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ज्यादा पसीना आने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?</h2>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन</strong> में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, अत्यधिक पसीना आना (Hyperhidrosis) कई कारणों से हो सकता है। इनमें शामिल हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>थायरॉइड की समस्या</li>



<li>डायबिटीज</li>



<li>संक्रमण (Infections)</li>



<li>हार्मोनल बदलाव</li>



<li>मोटापा</li>



<li>नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्याएं</li>



<li>कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">कुछ मामलों में यह समस्या अपने आप भी हो सकती है, जबकि कई मामलों में यह किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">विटामिन और मिनरल्स का संबंध</h2>



<p class="wp-block-paragraph">एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि कुछ मरीजों में अत्यधिक पसीने की समस्या के साथ <strong>विटामिन डी और मैग्नीशियम के स्तर कम</strong> पाए गए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि शोधकर्ताओं ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इनकी कमी सीधे तौर पर पसीने का कारण है, लेकिन इनके बीच संबंध पर अभी और शोध की आवश्यकता बताई गई है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">किन लक्षणों में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">अगर ज्यादा पसीने के साथ निम्न लक्षण भी दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>अचानक वजन कम होना</li>



<li>लगातार थकान</li>



<li>दिल की धड़कन तेज होना</li>



<li>चक्कर आना</li>



<li>बुखार</li>



<li>सांस लेने में परेशानी</li>



<li>रात में अत्यधिक पसीना आना</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे या बिना किसी कारण अचानक बढ़ जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ज्यादा पसीना कम करने के आसान उपाय</h2>



<p class="wp-block-paragraph">कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर इस समस्या को कम किया जा सकता है:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और शरीर को हाइड्रेट रखना</li>



<li>हल्के और ढीले कपड़े पहनना</li>



<li>बहुत गर्म वातावरण से बचना</li>



<li>संतुलित और पोषक आहार लेना</li>



<li>तनाव को नियंत्रित करना</li>



<li>नियमित स्वास्थ्य जांच कराना</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h2>



<p class="wp-block-paragraph">अत्यधिक पसीना कई बार सामान्य कारणों से होता है, लेकिन यह शरीर में किसी अंदरूनी समस्या का संकेत भी हो सकता है। सही समय पर पहचान और इलाज से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।</p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity" />
<p>The post <a href="https://newj9.com/archives/154782">ज्यादा पसीना आना सामान्य नहीं भी हो सकता है, जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव के तरीके</a> appeared first on <a href="https://newj9.com">Newj9</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>महिलाओं को साल में एक बार कौन-से ब्लड टेस्ट जरूर कराने चाहिए?</title>
		<link>https://newj9.com/archives/154671</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 06:32:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[blood tests]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newj9.com/?p=154671</guid>

					<description><![CDATA[<p>हेल्थ डेस्क: महिलाओं की सेहत जीवन के अलग-अलग चरणों में कई तरह के बदलावों से गुजरती है। हार्मोनल बदलाव, पीरियड्स, प्रेगनेंसी, पोषण की कमी और बढ़ती उम्र का असर शरीर पर साफ दिखाई देता है। कई बार शुरुआती लक्षण न दिखने के कारण बीमारियों का पता देर से चलता है। ऐसे में नियमित हेल्थ चेकअप &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://newj9.com/archives/154671">महिलाओं को साल में एक बार कौन-से ब्लड टेस्ट जरूर कराने चाहिए?</a> appeared first on <a href="https://newj9.com">Newj9</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>हेल्थ डेस्क:</strong> महिलाओं की सेहत जीवन के अलग-अलग चरणों में कई तरह के बदलावों से गुजरती है। हार्मोनल बदलाव, पीरियड्स, प्रेगनेंसी, पोषण की कमी और बढ़ती उम्र का असर शरीर पर साफ दिखाई देता है। कई बार शुरुआती लक्षण न दिखने के कारण बीमारियों का पता देर से चलता है। ऐसे में नियमित हेल्थ चेकअप और ब्लड टेस्ट बेहद जरूरी माने जाते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों के अनुसार, समय-समय पर की गई जांचें शरीर में पोषक तत्वों की कमी, थायरॉयड, डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों के जोखिम का पहले ही पता लगाने में मदद करती हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">महिलाओं के लिए जरूरी ब्लड टेस्ट कौन-से हैं?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">जयपुर स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिमा पोद्दार के अनुसार, महिलाओं को साल में कम से कम एक बार कुछ जरूरी ब्लड टेस्ट जरूर कराने चाहिए। इनमें शामिल हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>CBC (Complete Blood Count)</li>



<li>ब्लड शुगर टेस्ट</li>



<li>लिपिड प्रोफाइल</li>



<li>थायरॉयड प्रोफाइल (TSH, T3, T4)</li>



<li>विटामिन D टेस्ट</li>



<li>विटामिन B12 टेस्ट</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">डॉक्टर के मुताबिक, CBC टेस्ट से एनीमिया और खून से जुड़ी समस्याओं का पता चलता है, जबकि ब्लड शुगर टेस्ट डायबिटीज की पहचान में मदद करता है। लिपिड प्रोफाइल हार्ट डिजीज के खतरे का आकलन करता है और थायरॉयड टेस्ट हार्मोनल असंतुलन को समझने में मदद करता है। वहीं विटामिन D और B12 की कमी कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">अगर शरीर में कुछ खास लक्षण दिखाई दें तो ब्लड टेस्ट कराने में देरी नहीं करनी चाहिए। इनमें शामिल हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>लगातार थकान और कमजोरी</li>



<li>चक्कर आना</li>



<li>अचानक वजन बढ़ना या घटना</li>



<li>बालों का झड़ना</li>



<li>पीरियड्स में अनियमितता</li>



<li>बार-बार बीमार पड़ना</li>



<li>अधिक प्यास लगना</li>



<li>बार-बार पेशाब आना</li>



<li>दिल की धड़कन तेज होना</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसे संकेत किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">नियमित जांच क्यों जरूरी है?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">कई बीमारियां शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती हैं। नियमित ब्लड टेस्ट शरीर की अंदरूनी स्थिति को समझने और संभावित जोखिमों को समय रहते पहचानने में मदद करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तब जांच कराना पर्याप्त नहीं है जब समस्या गंभीर हो जाए, बल्कि सालाना हेल्थ चेकअप एक आदत बनानी चाहिए।</p>



<h2 class="wp-block-heading">महिलाओं की बेहतर सेहत के लिए जरूरी आदतें</h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>संतुलित और पोषक आहार लें</li>



<li>नियमित व्यायाम करें</li>



<li>पर्याप्त नींद लें</li>



<li>तनाव को नियंत्रित करें</li>



<li>पर्याप्त पानी पिएं</li>



<li>समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराएं</li>



<li>किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h2>



<p class="wp-block-paragraph">महिलाओं के लिए समय पर ब्लड टेस्ट और हेल्थ चेकअप कराना न केवल बीमारियों की पहचान में मदद करता है, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ जीवन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सही समय पर जांच कराना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव का सबसे आसान तरीका है।</p>
<p>The post <a href="https://newj9.com/archives/154671">महिलाओं को साल में एक बार कौन-से ब्लड टेस्ट जरूर कराने चाहिए?</a> appeared first on <a href="https://newj9.com">Newj9</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
