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	<title>हाईकोर्ट Archives - Newj9</title>
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	<link>https://newj9.com/archives/tag/हाईकोर्ट</link>
	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
	<lastBuildDate>Sat, 18 Oct 2025 14:53:28 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
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		<title>यूपी के स्कूल-कॉलेजों में अब नहीं लगेंगे मेले, हाईकोर्ट ने लगाई व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक</title>
		<link>https://newj9.com/archives/149789</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Oct 2025 14:53:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्कूल-कॉलेजों में अब किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों जैसे मेले या व्यापारिक आयोजनों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि शैक्षणिक संस्थान सिर्फ शिक्षा और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए हैं — उनका इस्तेमाल कमाई के लिए नहीं किया जा सकता। &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश के स्कूल-कॉलेजों में अब किसी भी तरह की <strong>व्यावसायिक गतिविधियों जैसे मेले या व्यापारिक आयोजनों</strong> पर पूरी तरह से <strong>पाबंदी</strong> लगा दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि शैक्षणिक संस्थान सिर्फ शिक्षा और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए हैं — उनका इस्तेमाल कमाई के लिए नहीं किया जा सकता।</p>



<h3 class="wp-block-heading"> हाईकोर्ट ने क्या कहा?</h3>



<p><strong>चीफ जस्टिस अरुण भंसाली</strong> और <strong>जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र</strong> की डिवीजन बेंच ने हमीरपुर के गिरजा शंकर की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। याचिका हमीरपुर के एक कॉलेज में लगे व्यवसायिक मेले के खिलाफ दाखिल की गई थी।</p>



<p><strong>कोर्ट की सख्त टिप्पणी:</strong></p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p>“<strong>शैक्षणिक संस्थानों की ज़मीन और भवनों का इस्तेमाल किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए नहीं किया जा सकता।</strong>”</p>
</blockquote>



<h3 class="wp-block-heading"> <strong>अब क्या-क्या नहीं होगा स्कूलों में?</strong></h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>बिज़नेस फेयर या एग्ज़ीबिशन</li>



<li>स्टॉल/प्रमोशन आधारित इवेंट</li>



<li>किराए पर स्कूल प्लेग्राउंड या हॉल</li>



<li>किसी प्रकार की गैर-शैक्षणिक व्यावसायिक गतिविधि</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"> <strong>राज्य सरकार को निर्देश:</strong></h3>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>1 महीने में सर्कुलर जारी करें</strong></li>



<li>सभी ज़िलों के <strong>डीएम, एसपी और स्कूल प्रशासन</strong> को भेजें आदेश</li>



<li>आदेश के उल्लंघन पर <strong>सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो</strong></li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"> कोर्ट ने क्यों उठाया ये कदम?</h3>



<p>हाईकोर्ट ने यह निर्णय <strong>छात्रों के हित और शिक्षा के माहौल को संरक्षित रखने</strong> के लिए लिया है। कोर्ट का कहना है कि खेल के मैदानों और स्कूल भवनों की <strong>संरचना शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों</strong> के लिए है — न कि व्यावसायिक फायदे के लिए।</p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p>“कोई भी कानून ऐसा नहीं है जो प्राइमरी, सेकेंडरी या हायर एजुकेशन देने वाले संस्थानों को उनकी संपत्ति का व्यावसायिक उपयोग करने की अनुमति देता हो।”</p>
</blockquote>



<h3 class="wp-block-heading"> <strong>क्या रहेगा अनुमति में?</strong></h3>



<p><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/2714.png" alt="✔" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> डिबेट प्रतियोगिता<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/2714.png" alt="✔" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> सांस्कृतिक कार्यक्रम<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/2714.png" alt="✔" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> खेलकूद<br><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/16.0.1/72x72/2714.png" alt="✔" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> शैक्षणिक सेमिनार या वर्कशॉप</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हाईकोर्ट में सख्ती: फर्रुखाबाद एसपी को कोर्ट से निकलने से रोका</title>
		<link>https://newj9.com/archives/149700</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Oct 2025 10:24:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर से एक अधिवक्ता को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने फर्रुखाबाद की पुलिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए एसपी आरती सिंह को आदेश दिया कि जब तक अधिवक्ता को न्यायालय के सामने पेश नहीं किया जाता, तब तक वह कोर्ट &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर से एक अधिवक्ता को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने फर्रुखाबाद की पुलिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए एसपी आरती सिंह को आदेश दिया कि जब तक अधिवक्ता को न्यायालय के सामने पेश नहीं किया जाता, तब तक वह कोर्ट कक्ष न छोड़ें।</p>



<p>यह मामला अधिवक्ता <strong>अवधेश मिश्रा</strong> से जुड़ा है, जिन्हें एसओजी टीम ने मंगलवार को हाईकोर्ट परिसर के बाहर से हिरासत में ले लिया था। अधिवक्ता मिश्रा, बंदी प्रत्यय दायर करने वाली याची <strong>प्रीती यादव</strong> के साथ सुनवाई के लिए कोर्ट आए थे।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या है पूरा मामला</strong></h3>



<p>प्रीती यादव ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्याक्षिकरण याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि <strong>फर्रुखाबाद पुलिस ने उनके पति अर्जुन सिंह यादव को 8 सितंबर को अवैध रूप से हिरासत में लिया था</strong>, और फिर 14 सितंबर की रात 11 बजे रिहा किया।</p>



<p>याची का कहना था कि पुलिस ने रिहाई से पहले उनके पति से जबरन एक कागज़ पर यह लिखवाया कि उन्हें पुलिस ने कभी हिरासत में नहीं लिया था।</p>



<p>इस मामले में <strong>न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ</strong> सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने पहले ही फर्रुखाबाद के थाना प्रभारी कायमगंज <strong>अनुराग मिश्रा</strong>, सीओ कायमगंज और <strong>एसपी आरती सिंह</strong> को 14 अक्टूबर को न्याय में बाधा डालने के मामले में पेश होने के निर्देश दिए थे।</p>



<p>अब न्यायालय ने बुधवार दोपहर 12 बजे एसपी को हलफनामा के साथ पुनः उपस्थित होने का आदेश दिया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>किस केस से जुड़ा है विवाद</strong></h3>



<p>यह पूरा विवाद <strong>2 अगस्त</strong> को ग्राम दत्तू नगला में हुई एक मारपीट की घटना से जुड़ा है, जिसमें मनोज यादव नामक व्यक्ति की मौत हो गई थी।</p>



<p>मृतक मनोज के पिता विजय सिंह ने कई लोगों के खिलाफ <strong>थाना शमसाबाद</strong> में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत बीमारी से होने की बात सामने आई थी।</p>



<p>इसी केस में फर्रुखाबाद पुलिस ने प्रीती यादव के पति अर्जुन सिंह यादव और राजा यादव को 8 सितंबर को हिरासत में लिया था, जिसे लेकर अब हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अब क्या होगा आगे</strong></h3>



<p>हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि <strong>अधिवक्ताओं के अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा</strong>। कोर्ट ने फर्रुखाबाद पुलिस को चेतावनी दी है कि वह इस मामले में स्पष्ट हलफनामा दाखिल करे और अधिवक्ता अवधेश मिश्रा को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।</p>
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		<item>
		<title>“मॉडल चाय वाली” को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, पुलिस उत्पीड़न की जांच के आदेश</title>
		<link>https://newj9.com/archives/148716</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jul 2025 11:34:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[“मॉडल चाय वाली”]]></category>
		<category><![CDATA[हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ, 26 जुलाई 2025 — उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में &#8216;मॉडल चाय वाली&#8217; के नाम से मशहूर सिमरन गुप्ता को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कथित पुलिस उत्पीड़न और मारपीट के मामले में लखनऊ हाईकोर्ट ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को जांच के आदेश दिए हैं और छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>लखनऊ, 26 जुलाई 2025</strong> — उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में &#8216;मॉडल चाय वाली&#8217; के नाम से मशहूर सिमरन गुप्ता को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कथित पुलिस उत्पीड़न और मारपीट के मामले में लखनऊ हाईकोर्ट ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को जांच के आदेश दिए हैं और छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या है मामला?</h3>



<p>सिमरन गुप्ता, जो इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर &#8216;मॉडल चाय वाली&#8217; नाम से अपनी दुकान चलाती हैं, ने 8 जून 2025 की रात पुलिसकर्मियों पर मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी सिमरन के स्टॉल पर उनके साथ हाथापाई करते और बदसलूकी करते नजर आ रहे हैं।</p>



<p>सिमरन ने आरोप लगाया कि राम राम बैंक चौकी के तत्कालीन इंचार्ज आलोक चौधरी, सिपाही अभिषेक यादव, दुर्गेश वर्मा और महिला सिपाही किरन अग्निहोत्री ने बिना कारण उनके साथ बदसलूकी की और उनका फोन भी छीन लिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कोर्ट ने लिया सख्त रुख</h3>



<p>सिमरन द्वारा हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनीष कुमार की खंडपीठ ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर को जांच का जिम्मा सौंपा है। कोर्ट ने कहा कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">वकील की दलील</h3>



<p>सिमरन के वकील चंदन श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि पीड़िता ने घटना के बाद पुलिस कमिश्नर और डीसीपी को शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिसकर्मियों पर उत्तर प्रदेश पुलिस अधिनियम की धारा 7 और 29 के तहत कार्यवाही होनी चाहिए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कौन हैं सिमरन गुप्ता?</h3>



<p>गोरखपुर की रहने वाली सिमरन गुप्ता, जिनका असली नाम आंचल गुप्ता है, 2018 में &#8216;मिस गोरखपुर&#8217; रह चुकी हैं। आर्थिक हालात और पिता की बीमारी के चलते उन्होंने मॉडलिंग छोड़ी और &#8216;मॉडल चाय वाली&#8217; के नाम से चाय का स्टॉल शुरू किया। पहले गोरखपुर और अब लखनऊ में उनकी चाय की दुकान खासा लोकप्रिय है। सिमरन सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 29,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अगली सुनवाई</h3>



<p>कोर्ट ने छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई इसी अवधि के बाद होगी।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हाईकोर्ट की फटकार: &#8220;दिल्ली वालों को सीवर मिक्स पानी पीने पर मजबूर कर रहे हैं DJB अधिकारी&#8221;</title>
		<link>https://newj9.com/archives/148167</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 11:07:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; नई दिल्ली &#124; दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी के पूर्वी इलाके के निवासियों को गंदे और सीवर मिक्स पानी की आपूर्ति को लेकर दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि &#8220;निवासियों को मजबूर किया जा रहा है कि वे सीवर मिक्स पानी पिएं&#8221;, और DJB &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<h2 class="wp-block-heading"></h2>



<h3 class="wp-block-heading">&nbsp;</h3>



<p><strong>नई दिल्ली | </strong>दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी के पूर्वी इलाके के निवासियों को गंदे और सीवर मिक्स पानी की आपूर्ति को लेकर <strong>दिल्ली जल बोर्ड (DJB)</strong> को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि <strong>&#8220;निवासियों को मजबूर किया जा रहा है कि वे सीवर मिक्स पानी पिएं&#8221;</strong>, और DJB तब तक कुछ नहीं करता जब तक मामला अदालत में न आ जाए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&nbsp;योजना विहार, आनंद विहार और जागृति एन्क्लेव में गंभीर जल संकट</h3>



<p>यह मामला <strong>वकील ध्रुव गुप्ता</strong> द्वारा दायर जनहित याचिका के जरिए सामने आया, जिसमें बताया गया कि <strong>12 जून 2025 से इन इलाकों में बदबूदार, काला और दूषित पानी सप्लाई हो रहा है</strong>, जिससे आम लोगों खासकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&nbsp;कोर्ट ने DJB को चेताया: &#8220;नाकाम रहे तो सख्त कार्रवाई होगी&#8221;</h3>



<p><strong>मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय</strong> और <strong>न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला</strong> की पीठ ने जल बोर्ड को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>16 अगस्त 2025</strong> तक योजना विहार की <strong>जर्जर पाइपलाइनों को बदला जाए</strong></li>



<li>इलाके का <strong>तुरंत निरीक्षण</strong> कर <strong>5 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट</strong> अदालत में पेश की जाए</li>



<li>समस्या मिलने पर <strong>तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई</strong> की जाए</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading">&nbsp;HC का सख्त संदेश: &#8220;स्वच्छ पानी हर नागरिक का मौलिक अधिकार&#8221;</h3>



<p>कोर्ट ने कहा कि,&#8221;स्वच्छ पेयजल हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इसकी अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर जिम्मेदार अधिकारी फेल होते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।&#8221;</p>



<h3 class="wp-block-heading">&nbsp;पूरे दिल्ली को याचिका में शामिल करने से कोर्ट ने किया इनकार</h3>



<p>हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस मांग को ठुकरा दिया कि <strong>पूरे दिल्ली के दूषित पानी के मुद्दे को शामिल किया जाए।</strong> कोर्ट का कहना था कि एक साथ पूरे शहर की निगरानी मुश्किल होगी, इसलिए फिलहाल योजना विहार, आनंद विहार और जागृति एन्क्लेव जैसे इलाकों में ही सुधार लाया जाए।</p>
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