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	<title>Rajasthan Archives - Newj9</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
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		<title>NFHS-6 का अलर्ट: राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं की बिगड़ती तस्वीर सामने आई</title>
		<link>https://newj9.com/archives/154677</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 06:38:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जयपुर: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) 2023-24 के ताजा आंकड़ों ने राजस्थान की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में किशोर गर्भावस्था की दर में बढ़ोतरी हुई है, जबकि संस्थागत प्रसव, टीकाकरण और बच्चों के पोषण से जुड़े कई संकेतकों में गिरावट दर्ज की गई &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>जयपुर:</strong> राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) 2023-24 के ताजा आंकड़ों ने राजस्थान की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में किशोर गर्भावस्था की दर में बढ़ोतरी हुई है, जबकि संस्थागत प्रसव, टीकाकरण और बच्चों के पोषण से जुड़े कई संकेतकों में गिरावट दर्ज की गई है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">किशोर गर्भावस्था में बढ़ोतरी</h2>



<p>NFHS-6 के मुताबिक राजस्थान में 15 से 19 वर्ष की लड़कियों में किशोर गर्भावस्था दर 3.7 प्रतिशत से बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि बाल विवाह, शिक्षा की कमी और सामाजिक जागरूकता से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा है।</p>



<p>इसी बीच राज्य में कम उम्र में गर्भधारण के मामलों को लेकर सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">गर्भनिरोधक उपयोग में बदलाव</h2>



<p>रिपोर्ट में गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग में भी बदलाव देखने को मिला है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>आधुनिक गर्भनिरोधक उपयोग: 62.1% से घटकर 57.1%</li>



<li>कुल गर्भनिरोधक उपयोग: 72.3% से बढ़कर 74.4%</li>



<li>पारंपरिक तरीकों का उपयोग: 10.2% से बढ़कर 17.3%</li>
</ul>



<p>विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक तरीकों में बढ़ोतरी चिंता का विषय है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">संस्थागत प्रसव और स्वास्थ्य सेवाओं में गिरावट</h2>



<p>NFHS-6 के अनुसार राज्य में संस्थागत प्रसव की दर 94.9% से घटकर 94.1% हो गई है। सरकारी अस्पतालों में प्रसव का प्रतिशत भी 77% से गिरकर 70.5% पर आ गया है।</p>



<p>कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में प्रसव की दर भी 95.6% से घटकर 94.9% दर्ज की गई है। वहीं सीजेरियन डिलीवरी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है, जो 10.4% से बढ़कर 15.6% हो गई है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">बच्चों के पोषण पर गंभीर असर</h2>



<p>रिपोर्ट में बच्चों के पोषण से जुड़े आंकड़े भी चिंताजनक हैं।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>6 महीने से कम उम्र में केवल स्तनपान: 70.4% से घटकर 54.3%</li>



<li>वेस्टिंग (कम वजन): 16.8% से बढ़कर 19.8%</li>



<li>अंडरवेट बच्चे: 27.6% से बढ़कर 33.3%</li>
</ul>



<p>विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े बच्चों में बढ़ते कुपोषण की ओर संकेत करते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">टीकाकरण दर में गिरावट</h2>



<p>टीकाकरण से जुड़े आंकड़ों में भी गिरावट दर्ज की गई है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>पूर्ण टीकाकरण: 85.3% से घटकर 75%</li>



<li>बीसीजी वैक्सीन: 95.6% से घटकर 92.9%</li>



<li>पेंटावेलेंट वैक्सीन: 89.4% से घटकर 87.2%</li>



<li>खसरा टीका (पहली डोज): 91.1% से घटकर 90.3%</li>
</ul>



<p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह गिरावट भविष्य में बीमारियों के प्रकोप का खतरा बढ़ा सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">50 से अधिक संगठनों की चिंता</h2>



<p>जन स्वास्थ्य अभियान (JSA) राजस्थान समेत 50 से अधिक सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर इस स्थिति पर चिंता जताई है। संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री से राज्य स्तरीय कार्ययोजना बनाने, जिलावार समीक्षा करने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की मांग की है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या हैं प्रमुख मांगें?</h2>



<p>संगठनों ने सरकार से निम्न कदम उठाने की मांग की है:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रमों को पुनः सक्रिय करना</li>



<li>बाल विवाह और किशोर गर्भावस्था रोकने के प्रयास तेज करना</li>



<li>सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की गुणवत्ता सुधारना</li>



<li>दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना</li>



<li>मातृ-शिशु स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी करना</li>



<li>पोषण और स्तनपान को लेकर जागरूकता अभियान चलाना</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h2>



<p>NFHS-6 के ये आंकड़े संकेत देते हैं कि राजस्थान में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।</p>
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