कब हुई भारत में बजट की शुरुआत, क्या थी इसकी वजह

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2023 को वित्त वर्ष 2023-24 का बजट (Budget 2023-2024) पेश करेंगी. इस बजट से आम आदमी व कारोबारियों को काफी उम्मीदें हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार टैक्स छूट वाली आय श्रेणी को 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर दिया जाएगा. ऐसा होता है या नहीं यह तो बजट वाले दिन ही पता चलेगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बजट की शुरुआत कैसे हुई? भारत में पहला बजट कब पेश किया गया? अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं.

भारत का पहला बजट 1860 में पेश किया गया था. तब भारत में अंग्रेजों का शासन था. भारत का पहला जेम्स विल्सन (James Wilson) लेकर आए थे. उन्होंने भारत की जनता से पैसा वसूलने के लिए अंग्रेजों को कारगर हथियार दिया था. इसकी बहुत आलोचना हुई थी और व्यापारियों को इनकम टैक्स प्रणाली का विचार पसंद नहीं आया था. हालांकि, विल्सन ये कहकर इसका बचाव किया था कि ब्रिटिश हुकूमत भारतीयों को सुरक्षित कारोबार का माहौल प्रदान करती है, इसलिए उसका टैक्स लेना बनता है. दरअसल, इसका एक बड़ा कारण ये था कि 1857 की क्रांति के कारण ब्रिटिश सरकार का बहुत धन खर्च हो गया था. उन्हें इसकी भरपाई के लिए कोई उपाय चाहिए था जो विल्सन ने उन्हें दिया.

कितना टैक्स 
1860 में जब पहली बार टैक्स लगाया गया तो इनकम के सोर्स को चार भागों में बांटा गया. प्रॉपर्टी से हुई इनकम, पैशे या व्यापार से हुई इनकम, सिक्योरिटीज से हुई इनकम और सैलरी तथा पेंशन से मिली आय. तब टैक्स के केवल दो स्लैब थे. अगर किसी व्यक्ति की आय साल भर में ₹500 से कम है तो उस पर दो फीसदी टैक्स लगता था. जबकि ₹500 से अधिक की आय पर 4 फीसदी टैक्स देना होता था. इसका मतलब है कि ₹500 रुपए से कम आय वाले लोगों को ₹10 और अधिक आय वाले लोगों को ₹20 टैक्स देना पड़ता था. आपको बता दें कि देश में पेपर करेंसी की शुरुआत भी विल्सन ने ही की थी.

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