उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश: वक्फ संपत्तियों के डिजिटाइजेशन में बड़ी कार्रवाई, 31 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन रद्द

उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के डिजिटल रिकॉर्ड और सत्यापन की प्रक्रिया के तहत चल रहे व्यापक अभियान में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। केंद्र सरकार के डिजिटल पोर्टल UMMEED Portal पर दर्ज हजारों संपत्तियों की जांच के बाद अब तक 31 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा चुका है।

कुल संपत्तियों की स्थिति

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पोर्टल पर दर्ज 1,18,302 वक्फ संपत्तियों में से:

  • 53,711 संपत्तियों को मंजूरी दी गई है
  • 20,546 संपत्तियां अंतिम जांच में हैं
  • 31,328 संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा चुका है

इसके अलावा, लगभग 31,192 मामलों में वक्फ दावों को खारिज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

यह पूरी प्रक्रिया Ministry of Minority Affairs (India) की निगरानी में चल रही है।

रजिस्ट्रेशन रद्द होने के कारण

जांच में सामने आई प्रमुख अनियमितताओं में शामिल हैं:

  • राजस्व रिकॉर्ड और वक्फ रिकॉर्ड में खसरा नंबर का मेल न होना
  • संपत्ति के क्षेत्रफल (रकबा) में भारी अंतर
  • एक ही संपत्ति का अलग-अलग रिकॉर्ड में दर्ज होना
  • दस्तावेजों में तकनीकी त्रुटियां और पुरानी गलतियां

प्रभावित जिले

सबसे अधिक रद्दीकरण कुछ जिलों में दर्ज किया गया है:

  • जौनपुर: 1,938
  • बाराबंकी: 1,521
  • मुजफ्फरनगर: 1,510
  • अलीगढ़: 1,061
  • बस्ती: 1,000
  • सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, आजमगढ़ और लखनऊ में भी सैकड़ों मामलों में रद्दीकरण हुआ है

समय सीमा और कानूनी स्थिति

शुरुआत में रजिस्ट्रेशन के लिए 6 महीने का समय दिया गया था, जिसे बाद में Uttar Pradesh Sunni Central Waqf Board और Uttar Pradesh Shia Central Waqf Board की अपील पर वक्फ ट्रिब्यूनल द्वारा 6 महीने के लिए बढ़ाया गया था। यह अतिरिक्त समय अगले महीने 5 जून को समाप्त हो रहा है।

कानूनी रूप से कई मामलों में आगे की सुनवाई Supreme Court of India या वक्फ ट्रिब्यूनल में की जा सकती है, लेकिन प्रक्रिया को जटिल और समय लेने वाला बताया जा रहा है।

आगे की प्रक्रिया

अधिकारियों के अनुसार मुतवल्लियों को 5 जून तक का समय दिया गया है कि वे:

  • दस्तावेजों में सुधार करें
  • सही जानकारी दोबारा अपलोड करें
  • या आवश्यक होने पर ट्रिब्यूनल में अपील करें

अगर तय समय सीमा में सुधार नहीं किया गया तो संबंधित संपत्तियों को पोर्टल से हटाया जा सकता है और उनका वक्फ दर्जा रद्द माना जाएगा।

इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को पारदर्शी और डिजिटल बनाना बताया जा रहा है।

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