सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्गों की देखभाल पर जताई गंभीर चिंता, कहा- “यह सिविलाइजेशन ट्रेमर है”

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने देश में बुजुर्गों की उचित देखभाल को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों के बीच कमजोर होते संबंध और बुजुर्गों की देखभाल में कमी सामाजिक ताने-बाने के लिए गंभीर खतरा बन रही है। जस्टिस सूर्यकांत ने इसे सिविलाइजेशन ट्रेमर करार दिया।
बुजुर्गों के खिलाफ बढ़ रहे डिजिटल फ्रॉड और उपेक्षा के मामले
जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम (MWPSC Act) पर आयोजित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि बुजुर्गों के साथ बढ़ते डिजिटल फ्रॉड, परिजनों द्वारा छोड़े जाने और लंबित मामलों में फंसने के मामले चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि कानून को बुजुर्गों की गरिमा बनाए रखने वाला ढांचा होना चाहिए। इस अवसर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार भी मौजूद थे।
बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और भावनात्मक चुनौतियां
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि देश को तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी की भावनात्मक, डिजिटल और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना होगा। उन्होंने युवाओं से बुजुर्गों की डिजिटल मदद करने और उन्हें ‘लाइन में अकेला न खड़ा’ होने देने की अपील की।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक विधवा करीब 50 साल तक भरण-पोषण के लिए संघर्ष करती रही, और सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत उसकी संपत्ति बहाल की। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “न्याय केवल तकनीकी रूप से सही होने से पूरा नहीं होता, गरिमा का अधिकार उम्र के साथ खत्म नहीं होता।”
भारत में बुजुर्गों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि
सामाजिक न्याय सचिव अमित यादव ने बताया कि वर्तमान में भारत में बुजुर्गों की संख्या 10.38 करोड़ है, जो 2050 तक 34 करोड़ तक पहुँच जाएगी। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आधुनिकता ने पारंपरिक संरचनाओं को कमजोर कर दिया है, जिससे उस पुरानी दुनिया को खोने का खतरा मंडरा रहा है जिसने समाज में इंसानियत बनाए रखी।



