Noida हिंसा पर सियासत तेज: मंत्री ने बताया ‘साजिश’, अखिलेश यादव ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार

Noida Violence News: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में श्रमिकों का आंदोलन हिंसक होने के बाद अब इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। नोएडा में सोमवार, 13 अप्रैल को पूरे दिन हाई अलर्ट रहा। प्रदर्शन के दौरान सरकारी वाहनों, इमारतों और सड़कों को नुकसान पहुंचाया गया, वहीं पुलिस पर पथराव और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं।
🔹 भारी पुलिस बल के बाद काबू में आई स्थिति
श्रमिकों की सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया। हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया, जिसके बाद स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सका।
🔹 मंत्री ने बताया ‘साजिश’, विपक्ष पर आरोप
योगी आदित्यनाथ सरकार के एक मंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को साजिश करार देते हुए विपक्षी दलों पर इसके पीछे हाथ होने का आरोप लगाया।
🔹 अखिलेश यादव का पलटवार
इस बयान पर अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सपा प्रमुख और कन्नौज सांसद ने कहा:
“यह सरकार का खुद कराया हुआ आंदोलन है। सरकार ने मजदूरों की बात नहीं सुनी।”
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह विपक्ष की साजिश थी, तो सरकार की इंटेलिजेंस एजेंसियां क्या कर रही थीं।
🔹 “इंटेलिजेंस फेलियर या सरकार की नाकामी?”
अखिलेश यादव ने कहा कि:
- नोएडा जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह की घटना होना गंभीर है
- अगर सरकार को पहले से जानकारी नहीं थी, तो यह सीधा-सीधा इंटेलिजेंस फेलियर है
- और अगर जानकारी थी, तो समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए
🔹 बंगाल चुनाव से जोड़ा सवाल
सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा:
“क्या यूपी की इंटेलिजेंस भी बंगाल चुनाव में प्रचार करने चली गई थी?”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए इस घटना को साजिश का नाम दे रही है।
🔹 मजदूरों की अनदेखी का आरोप
अखिलेश यादव ने कहा कि:
- सरकार केवल बड़े उद्योगपतियों पर ध्यान दे रही है
- महंगाई के दौर में मजदूरों की मांगें नजरअंदाज की गईं
- अगर समय रहते उनकी बात सुनी जाती, तो हालात नहीं बिगड़ते
🔹 समिति गठन पर भी उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने यह भी पूछा कि:
- मजदूरों से बातचीत के लिए समिति पहले क्यों नहीं बनाई गई?
- क्या सरकार पहले ही समाधान निकाल सकती थी?
उन्होंने कहा कि मजदूर ही उद्योगों की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करना भविष्य में निवेश और विकास को प्रभावित कर सकता है।
🔹 क्या है पूरा मामला?
- नोएडा में मजदूर सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे
- प्रदर्शन हिंसक हो गया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा
- इसके बाद सरकार ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का ऐलान किया
- अब इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है



