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महिला आरक्षण पर संसद में घमासान: 3 दिवसीय विशेष सत्र में 3 बड़े बिल पेश

भारत की संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन अहम विधेयक पेश किए। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 शामिल हैं।


लोकसभा में पेश हुए तीन बड़े बिल

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े विधेयक को सदन में रखा।

सरकार ने कहा कि इन बिलों का उद्देश्य महिला आरक्षण को लागू करने और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।


विपक्ष का विरोध और सदन में हंगामा

विपक्षी दलों ने इन विधेयकों का विरोध किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और सीपीआईएम सहित कई दलों ने बिल पेश करने के तरीके और समय पर सवाल उठाए।

के.सी. वेणुगोपाल और अखिलेश यादव ने सरकार पर जल्दबाजी और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया।


लोकसभा में वोटिंग और तीखी बहस

लोकसभा में बिल पेश करने को लेकर मत विभाजन हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, 333 सांसदों ने मतदान किया, जिसमें 207 सांसद पक्ष में और 126 विपक्ष में रहे। बाद में विधेयक पेश करने के पक्ष में 251 वोट और विरोध में 185 वोट पड़े।

इस दौरान सदन में जोरदार बहस देखने को मिली और विपक्षी सांसदों ने सरकार के कदम का विरोध किया।


अमित शाह और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक

अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सिर्फ तकनीकी आपत्तियां उठा रहा है और विधेयक की मेरिट पर चर्चा नहीं कर रहा।

वहीं विपक्ष ने कहा कि सरकार बिना पर्याप्त चर्चा के जल्दबाजी में विधेयक ला रही है।


अखिलेश यादव का बयान और आरक्षण पर बहस

अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाएं आरक्षण के दायरे में नहीं आतीं और सरकार से स्पष्ट नीति की मांग की।

इसके जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है और सरकार सभी वर्गों के लिए समान नीति पर काम कर रही है।


आगे क्या? कल होगा अहम मतदान

भारत की संसद में इन तीनों विधेयकों पर कल शाम 4 बजे मतदान होगा। सरकार ने कुल 12 घंटे की चर्चा तय की है और कहा है कि वह हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।


निष्कर्ष

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े इन विधेयकों ने संसद में बड़ा राजनीतिक टकराव खड़ा कर दिया है। आने वाले मतदान से यह तय होगा कि यह विधेयक आगे कानून का रूप ले पाएंगे या नहीं।

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