उत्तर प्रदेश

श्रमिक विवाद के बाद UP सरकार का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हालिया श्रमिक विरोध के बाद बड़ा कदम उठाते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद नई दरों की अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिससे ये कानूनी रूप से लागू हो गई हैं।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन के बाद हालात को नियंत्रित करने और वेतन विवाद खत्म करने के लिए सरकार ने उच्च स्तरीय समिति गठित की थी।


तीन श्रेणियों में तय हुई नई मजदूरी

समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने प्रदेश को तीन श्रेणियों में बांटते हुए नई न्यूनतम मजदूरी तय की है:

प्रथम श्रेणी (गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद):

  • अकुशल: ₹13,690 प्रति माह
  • अर्द्धकुशल: ₹15,059 प्रति माह
  • कुशल: ₹16,868 प्रति माह

द्वितीय श्रेणी (अन्य नगर निगम क्षेत्र):

  • अकुशल: ₹13,006 प्रति माह
  • अर्द्धकुशल: ₹14,306 प्रति माह
  • कुशल: ₹16,025 प्रति माह

तृतीय श्रेणी (अन्य जिले):

  • अकुशल: ₹12,356 प्रति माह
  • अर्द्धकुशल: ₹13,590 प्रति माह
  • कुशल: ₹15,224 प्रति माह

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन सभी दरों में मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) शामिल है।


क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?

दरअसल, 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन लागू नहीं हो सके थे, जिससे वेतन में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर लंबित संशोधन को लागू किया गया है।


औद्योगिक शांति बनाए रखने की कोशिश

सरकार का कहना है कि यह फैसला सिर्फ श्रमिकों को राहत देने के लिए ही नहीं, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों को सुचारु रखने के लिए भी जरूरी था। मजदूरी को लेकर श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच बढ़ते गतिरोध से उत्पादन प्रभावित होने लगा था।

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