यूपी में जातीय और महिला राजनीति तेज: सपा-बीजेपी में राजभर वोट बैंक पर टकराव

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बार राजनीतिक दलों के एजेंडे में महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ जातीय समीकरण भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
सपा और बीजेपी में राजभर वोट बैंक पर जोर
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में जूही सिंह की जगह सीमा राजभर को महिला सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया। इसे राजभर समाज को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि राजभर समाज उनका समर्थन कर रहा है।
ओम प्रकाश राजभर की भूमिका
ओम प्रकाश राजभर पूर्व में समाजवादी पार्टी के साथ थे, लेकिन अब एनडीए के साथ जुड़कर मंत्री बन चुके हैं।
पूर्वांचल में राजभर समाज की लगभग 4% आबादी मानी जाती है और 24 जिलों में यह वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है।
महिला राजनीति भी बनी बड़ा मुद्दा
इस समय यूपी की राजनीति में महिला वोट बैंक को साधने की भी होड़ मची है। महिला सशक्तिकरण और आरक्षण जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर महिला पदयात्रा का नेतृत्व किया, जिसमें ओम प्रकाश राजभर भी उनके साथ नजर आए।
सपा की रणनीति और पीडीए संदेश
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राजभर समाज को साधते हुए महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दिया है। इसे पार्टी की “पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)” रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी ने सपा की रणनीति पर पलटवार करते हुए कहा कि राजभर समाज कभी उन ताकतों के साथ नहीं जाएगा, जो इतिहास और विचारधारा को लेकर विवादित मानी जाती हैं।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले राजनीतिक दल जातीय समीकरण और महिला वोट बैंक को साधने में जुटे हैं। खासकर राजभर समाज को लेकर सपा और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। अब देखना होगा कि जनता के बीच कौन सा राजनीतिक दांव ज्यादा असर डालता है।




