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	<title>Allahabad High Court Archives - Newj9</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
	<lastBuildDate>Tue, 28 Apr 2026 10:35:31 +0000</lastBuildDate>
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		<title>इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी: सहमति से लंबे संबंध रेप नहीं, आरोपी को मिली अग्रिम जमानत</title>
		<link>https://newj9.com/archives/153209</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 10:35:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Allahabad High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेप के एक मामले में सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि बालिगों के बीच यदि लंबे समय तक सहमति से शारीरिक संबंध रहे हों, तो उसे बलात्कार नहीं माना जा सकता। यह टिप्पणी जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की सिंगल बेंच ने उस समय की, जब आजमगढ़ &#8230;</p>
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<p></p>



<p>प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेप के एक मामले में सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि बालिगों के बीच यदि लंबे समय तक सहमति से शारीरिक संबंध रहे हों, तो उसे बलात्कार नहीं माना जा सकता।</p>



<p>यह टिप्पणी जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की सिंगल बेंच ने उस समय की, जब आजमगढ़ के सिधारी थाने में दर्ज एक रेप केस में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही थी। अदालत ने सभी तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी को सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कोर्ट की प्रमुख टिप्पणी</h3>



<p>कोर्ट ने कहा कि मामले में दर्ज बयानों और FIR के तथ्यों में विरोधाभास है। अदालत के अनुसार, पीड़िता और आरोपी के बीच लंबे समय से आपसी सहमति से संबंध होने के संकेत मिलते हैं, जिससे प्रथम दृष्टया बलात्कार का मामला कमजोर प्रतीत होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आरोपी की दलील</h3>



<p>सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दावा किया कि उसे झूठे आरोपों में फंसाया गया है। वकील ने कहा कि यह मामला सहमति से बने संबंधों का है, न कि बलात्कार का। अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पीड़िता का पक्ष</h3>



<p>वहीं, सरकारी पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपी ने दबाव और बंदूक की नोक पर अपराध किया। हालांकि, अदालत ने पाया कि पीड़िता के बयान और FIR में कई तथ्यों का मेल नहीं है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जमानत का आदेश</h3>



<p>सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की शुरुआती जांच में अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा होता है। इसके आधार पर अदालत ने आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी, साथ ही उसे जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h3>



<p>यह फैसला एक बार फिर इस बहस को जन्म देता है कि सहमति और आरोपों के बीच कानूनी सीमा कैसे तय की जाए। मामला अभी जांच के अधीन है और अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर होगा</p>
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		<title>हाईकोर्ट का DIOS बाराबंकी पर सख्त रुख, STF जांच के आदेश</title>
		<link>https://newj9.com/archives/153055</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 06:31:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Allahabad High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ: उत्तर प्रदेश के Barabanki शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार और रिकॉर्ड में हेरफेर के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ओ.पी. त्रिपाठी को तत्काल पद से हटाने और पूरे मामले की STF जांच के आदेश दिए हैं। क्या है पूरा मामला? मामला &#8230;</p>
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]]></description>
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<h2 class="wp-block-heading"></h2>



<p>लखनऊ: उत्तर प्रदेश के Barabanki शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार और रिकॉर्ड में हेरफेर के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ओ.पी. त्रिपाठी को तत्काल पद से हटाने और पूरे मामले की STF जांच के आदेश दिए हैं।</p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity" />



<h2 class="wp-block-heading">क्या है पूरा मामला?</h2>



<p>मामला सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज, बाराबंकी से जुड़ा है, जहां एक सहायक अध्यापक अभय कुमार पर गंभीर आरोप लगे हैं।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नौकरी की</li>



<li>फिर बिना विधिवत कार्यमुक्त हुए बाराबंकी में दोबारा जॉइन कर लिया</li>



<li>DIOS और कॉलेज प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप लगे</li>
</ul>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity" />



<h2 class="wp-block-heading">वेतन भुगतान पर सवाल</h2>



<p>याचिकाकर्ता के अनुसार, जब शिक्षक छत्तीसगढ़ में तैनात थे, तब भी:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>अक्टूबर 2025 का वेतन बाराबंकी से जारी कर दिया गया</li>



<li>बाद में 14 नवंबर 2025 को उन्हें वहां से कार्यमुक्त किया गया</li>
</ul>



<p>इस विसंगति को अदालत ने गंभीर अनियमितता माना।</p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity" />



<h2 class="wp-block-heading">हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी</h2>



<p>न्यायालय ने इसे सिर्फ प्रशासनिक गलती नहीं बल्कि:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>रिकॉर्ड में हेरफेर</li>



<li>और संभावित जालसाजी</li>
</ul>



<p>करार दिया और सख्त कार्रवाई के आदेश दिए।</p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity" />



<h2 class="wp-block-heading">STF करेगी विस्तृत जांच</h2>



<p>मामले की जांच अब Special Task Force Uttar Pradesh को सौंपी गई है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>जांच अधिकारी कम से कम DSP रैंक का होगा</li>



<li>DIOS, प्रधानाचार्य और शिक्षक की भूमिका की जांच होगी</li>



<li>अगर दोष सिद्ध हुआ तो FIR दर्ज होगी</li>
</ul>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity" />



<h2 class="wp-block-heading">कोर्ट के बड़े निर्देश</h2>



<p>हाईकोर्ट ने कई सख्त आदेश दिए:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>DIOS ओ.पी. त्रिपाठी का तत्काल तबादला</li>



<li>अवैध पुनर्नियुक्ति को अमान्य घोषित</li>



<li>गलत तरीके से दिए गए वेतन की वसूली</li>



<li>विभागीय कार्रवाई के निर्देश</li>



<li>झूठे हलफनामे पर कड़ी आपत्ति</li>
</ul>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity" />



<h2 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h2>



<p>Barabanki का यह मामला शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और अब पूरी नजर STF जांच के नतीजों पर टिकी है।</p>
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		<item>
		<title>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी सुरक्षा का अधिकार दिया</title>
		<link>https://newj9.com/archives/150884</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Newj9]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 11:26:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Allahabad High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अहम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शादी के बिना किसी के साथ रहना गैरकानूनी नहीं है और इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने कहा कि व्यक्ति का जीवन &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अहम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शादी के बिना किसी के साथ रहना गैरकानूनी नहीं है और इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने कहा कि व्यक्ति का जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार सर्वोच्च है और इसे किसी सामाजिक स्वीकृति या अस्वीकृति से प्रभावित नहीं किया जा सकता।</p>



<p>कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि <strong>बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा से जीवनसाथी चुन सकता है</strong> और परिवार या अन्य कोई भी उनके निजी जीवन में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोर्ट ने राज्य और पुलिस को निर्देश दिया कि सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे जोड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।</p>



<p>यदि याचियों के पास <strong>शैक्षिक या वैध दस्तावेजों से बालिग होने का प्रमाण</strong> है, तो पुलिस उनके खिलाफ किसी भी जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं करेगी। ग्रामीण या कम शिक्षित पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों के मामले में पुलिस उम्र की पुष्टि के लिए वैधानिक प्रक्रियाएं अपना सकती है।</p>



<p>कोर्ट ने पूर्व के फैसलों से अलग रुख अपनाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को अवैध नहीं माना है और ऐसे जोड़ों को सुरक्षा देने से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार की दलील कि लिव-इन जोड़ों को सुरक्षा देना सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करेगा, को कोर्ट ने खारिज कर दिया।</p>



<p>कोर्ट ने दोहराया कि <strong>बालिग व्यक्ति को अपने पार्टनर को चुनने का पूर्ण अधिकार है</strong> और राज्य इस अधिकार से मुंह नहीं मोड़ सकता।</p>
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