मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को “ग़लत तरीके से लागू कर वोट चोरी” की साजिश करार देने के बाद अब विपक्ष संसद के शीतकालीन सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, बिहार चुनाव में हार के बाद विपक्ष, खासकर कांग्रेस, इस मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठाने के मूड में है। इसी के तहत नेता प्रतिपक्ष इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दलों—तृणमूल कांग्रेस, सपा, शिवसेना (UBT), लेफ्ट, डीएमके समेत अन्य से चर्चा कर रही हैं।
संख्या बल नहीं, लेकिन प्रस्ताव ज़रूर ला सकता है विपक्ष
सांसदीय संख्या बल विपक्ष के पास प्रस्ताव पास कराने लायक नहीं है।
लेकिन विपक्ष जानता है कि—
प्रस्ताव लाने का हक उसके पास है, पास कराने का नहीं।
इसके पीछे कांग्रेस की रणनीति यह है कि वह:
- बिहार में हार के बाद इंडिया ब्लॉक के भीतर बिखराव की खबरों को कमजोर करे
- SIR और वोटर लिस्ट में कथित धांधली को एक राष्ट्रीय मुद्दा बनाये
- सहयोगियों को एक मंच पर लाकर विपक्षी एकजुटता दिखाए
क्योंकि SIR और वोटर लिस्ट संशोधन पर ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, लेफ्ट, शिवसेना (UBT), स्टालिन आदि पहले ही असहमति जता चुके हैं।
विपक्ष क्यों ला रहा यह प्रस्ताव? इन चार बिंदुओं को बनाना चाहता है नैरेटिव
विपक्ष इस प्रस्ताव के जरिये जनता के सामने चार मुख्य बिंदु रखना चाहता है:
1. चयन समिति से CJI को हटाया गया
विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने ऐसा कानून बनाया जिसमें
PM, नेता विपक्ष और एक कैबिनेट मंत्री
के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त/आयुक्तों का चयन हो रहा है।
इससे CJI की जगह हट गई और “कार्यपालिका का प्रभाव बढ़ा”।
2. चुनाव आयुक्तों को विशेष कानूनी सुरक्षा
2023 के नए कानून के तहत चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों पर
न तो दीवानी
न ही फौजदारी मुकदमे
का सामना करना पड़ेगा।
विपक्ष का आरोप है कि इससे आयोग “अभियोज्य नहीं” रहा।
3. SIR, वोटर लिस्ट और CCTV फुटेज पर गंभीर आरोप
विपक्ष का आरोप है कि:
- SIR प्रक्रिया सत्ता पक्ष के पक्ष में की गई
- वोटर लिस्ट में बड़े स्तर पर छेड़छाड़ हुई
- मात्र 45 दिन बाद CCTV फुटेज नष्ट किया गया
- आयोग ने विपक्ष की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया
- सत्ता पक्ष के साथ मिलकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित की गई
विपक्ष इन आरोपों को प्रस्ताव के दौरान संसद में विस्तृत रूप से रखना चाहता है।
4. इंडिया ब्लॉक की एकजुटता दिखाने की कोशिश
विपक्ष की उम्मीद है कि:
- प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग होने पर
- पूरा INDIA ब्लॉक एक साथ दिखेगा
- ‘आप’ जैसे दल भी संभवतः विपक्ष के साथ खड़े होंगे
- इससे विपक्ष – एक ओर
- और सरकार-चुनाव आयोग – दूसरी ओर
यानी दो स्पष्ट खेमों की तस्वीर जनता तक जाएगी।
निष्कर्ष: पास होने की संभावना नहीं, लेकिन सियासी संदेश अहम
संख्याबल के मुताबिक यह प्रस्ताव पास होने की संभावना लगभग नगण्य है।
लेकिन राजनीतिक तौर पर विपक्ष चाहता है कि—
- पूरे मामले पर राष्ट्रीय चर्चा हो
- SIR और “वोट चोरी” का मुद्दा जनता तक पहुँचे
- और बिहार हार के बाद विपक्षी एकजुटता की छवि फिर मजबूत दिखे
इसलिए प्रस्ताव लाना ही विपक्ष के लिए सियासी रूप से फायदेमंद माना जा रहा है।




