महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनाव अंतिम चरण में, टिकट बंटवारे को लेकर घमासान तेज

मुंबई: मुंबई समेत महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनाव की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। मतदान और मतगणना के बाद अगले 15–16 दिनों में नतीजे घोषित किए जाने की संभावना है। राज्यभर में नगर निगमों की सत्ता को लेकर राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
मंगलवार को इन चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी, जबकि बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि टिकट वितरण और गठबंधन समीकरणों के चलते कई दावेदारों को टिकट नहीं मिल सका, जिससे राज्य के कई हिस्सों में असंतोष और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
टिकट न मिलने से नाराज कई इच्छुक उम्मीदवारों ने सीधे दल बदलने का रास्ता अपनाया। मंगलवार को पूरे राज्य में टिकट वितरण को लेकर भ्रम और हंगामे की स्थिति देखने को मिली।
छत्रपति संभाजीनगर में भाजपा की महिला पदाधिकारियों की भूख हड़ताल
छत्रपति संभाजीनगर में भाजपा से टिकट न मिलने पर पार्टी की दो महिला पदाधिकारी दिव्या मराठे और वर्षा सालुंके ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। दोनों पिछले 15 वर्षों से भाजपा से जुड़ी हुई हैं। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें अंतिम समय तक नामांकन पत्र नहीं दिया गया और उनके स्थान पर अन्य उम्मीदवारों को टिकट दे दिया गया।
दिव्या मराठे ने छत्रपति संभाजीनगर स्थित भाजपा के केंद्रीय प्रचार कार्यालय में भूख हड़ताल शुरू की है। वार्ड नंबर 20 से टिकट न मिलने पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें लिखित रूप में पार्षद पद से जुड़ा आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे भूख हड़ताल समाप्त नहीं करेंगी।
नागपुर में श्मशान घाट पर दिया गया एबी फॉर्म
नागपुर में टिकट वितरण को लेकर एक अनोखी और भावुक घटना सामने आई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के उम्मीदवार योगेश गोन्नाडे को नगर निगम वार्ड नंबर 5 और उनकी बेटी कृतिका गोन्नाडे को वार्ड नंबर 8 से उम्मीदवार बनाया गया है। योगेश गोन्नाडे की मां का मंगलवार को निधन हो गया था और उनका अंतिम संस्कार बुधवार को श्मशान घाट में किया गया।
इसी दौरान नामांकन की अंतिम समय-सीमा को देखते हुए स्थानीय शिवसेना नेताओं ने श्मशान घाट पहुंचकर दोनों को एबी फॉर्म सौंपे। पारिवारिक शोक के बीच मिले इस राजनीतिक निर्णय ने पूरे शहर में चर्चा को जन्म दे दिया।
राज्य में सियासी हलचल तेज
नगर निगम चुनावों में टिकट वितरण, गठबंधन की खींचतान और बगावत के चलते महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि शहरी निकायों में सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।
