प्रदूषण और ठंड ने बढ़ाई सांस की बीमारियां, दवाइयों की बिक्री तीन साल के रिकॉर्ड स्तर पर

दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरों में बढ़ते प्रदूषण और कड़ाके की ठंड का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी जैसी सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका असर दवाइयों की बिक्री में भी साफ दिखाई दे रहा है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 में रेस्पिरेटरी दवाइयों की बिक्री 1950 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है।
दिसंबर 2025 में रिकॉर्ड बिक्री
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर 2025 में सांस से जुड़ी दवाइयों की बिक्री दिसंबर 2024 के मुकाबले 10 प्रतिशत और दिसंबर 2023 के मुकाबले 18 प्रतिशत अधिक रही। अक्टूबर से दिसंबर के बीच, जब प्रदूषण चरम पर होता है, तब बिक्री में 2024 की तुलना में 14 प्रतिशत और 2023 के मुकाबले 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान एंटी-अस्थमा और सीओपीडी की दवाइयों की मांग सबसे ज्यादा रही।
उम्र के साथ बढ़ता खतरा, लेकिन युवा भी चपेट में
आर्टेमिस हॉस्पिटल्स में सांस के रोगों के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अरुण के मुताबिक, अस्थमा जैसी बीमारियां आमतौर पर 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा देखने को मिलती हैं। उम्र बढ़ने के साथ मसल स्ट्रेंथ और इम्युनिटी कम होती है, जिससे ठंड और प्रदूषण का असर गंभीर हो जाता है। हालांकि अब यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही और युवा वर्ग में भी तेजी से बढ़ रही है।
दिल्ली की हवा और सिगरेट का खतरनाक असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली की प्रदूषित हवा में सांस लेना दिन में 7 से 8 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान पहुंचाता है। अगर कोई व्यक्ति पहले से स्मोकिंग करता है तो इसका असर कई गुना बढ़ जाता है। 50 की उम्र के बाद लंग फंक्शन वैसे ही कमजोर होता है और स्मोकिंग इसे और तेजी से नुकसान पहुंचाती है।
बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
इस सर्दी में सबसे ज्यादा असर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ा है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बार एक नया ट्रेंड देखने को मिला है, जहां बड़ी संख्या में युवा भी सांस की तकलीफ लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों की सलाह: परहेज जरूरी, लापरवाही भारी
डॉक्टरों के मुताबिक, अस्थमा मरीजों को सर्दियों में मास्क पहनना, नियमित दवाइयां लेना और प्रदूषित इलाकों से बचना बेहद जरूरी है। जिन लोगों के लिए संभव हो, उन्हें सर्दियों के दौरान कुछ समय के लिए अपेक्षाकृत साफ और गर्म इलाकों में जाने की सलाह दी जाती है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेना खतरनाक हो सकता है।
मेडिकल स्टोर पर भी दिखा असर
द्वारका के एक केमिस्ट रोबिन शर्मा के मुताबिक, 2025 में उनकी दुकान पर रेस्पिरेटरी दवाइयों की बिक्री में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इनहेलर, नेब्युलाइजर दवाइयां, एंटीबायोटिक्स और बच्चों के सिरप की मांग भी तेजी से बढ़ी है।
सरकार और जनता दोनों की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण से निपटना सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। कारपूलिंग, पौधरोपण, इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल और मास्क पहनना जैसे छोटे कदम भी बड़ा असर डाल सकते हैं।
डॉक्टरों की चेतावनी साफ है—अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो सेहत पर पड़ा असर न सिर्फ जानलेवा हो सकता है, बल्कि इलाज का खर्च भी भारी पड़ेगा।



