वाराणसी में ओरल कैंसर का खतरा बढ़ा, प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले, प्रशासन ने बनाया बड़ा एक्शन प्लान

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। आंकड़ों के मुताबिक बीते पांच वर्षों में प्रदेश में सबसे ज्यादा ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) के मरीज वाराणसी जनपद में सामने आए हैं। एक ही जिले में इतने बड़े पैमाने पर ओरल कैंसर के मामले मिलना जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
ओरल कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए वाराणसी जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में प्रशासन ने वरिष्ठ चिकित्सकों, स्वास्थ्य अधिकारियों और एक्सपर्ट्स के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें रोकथाम और जन-जागरूकता के लिए व्यापक एक्शन प्लान तैयार किया गया है।
गुटखा और तंबाकू सबसे बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार ओरल कैंसर, जिसे आम भाषा में मुंह का कैंसर कहा जाता है, की सबसे बड़ी वजह गुटखा, तंबाकू और पान मसाला का सेवन है। वाराणसी में इन उत्पादों का अत्यधिक उपयोग ओरल कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
तीन स्तर पर होगी कैंसर की रोकथाम
बैठक में तय किया गया कि ओरल कैंसर की रोकथाम के लिए तीन स्तर पर काम किया जाएगा—
पहला स्तर:
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में एक विशेष APP के माध्यम से स्क्रीनिंग की जाएगी। इसमें लोग अपना फोटो अपलोड कर सकेंगे, जिसे AI तकनीक के जरिए प्राइमरी स्टेज पर जांचा जाएगा।
दूसरा स्तर:
ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर कैंप लगाकर जांच की जाएगी। संदिग्ध मरीजों को पहले हेल्थ सेंटर और जरूरत पड़ने पर वाराणसी के कैंसर अस्पतालों में रेफर किया जाएगा।
तीसरा स्तर (सबसे अहम):
स्कूल और कॉलेजों के आसपास गुटखा और पान मसाला की बिक्री पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया जाएगा। साथ ही कम उम्र के बच्चों और युवाओं को तंबाकू और गुटखा के सेवन से होने वाले खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
कैंसर मरीजों के लिए वरदान बन रहे बनारस के अस्पताल
वाराणसी में कैंसर के इलाज के लिए कई चिकित्सा केंद्र मौजूद हैं, लेकिन पं. मदन मोहन मालवीय कैंसर अस्पताल और भाभा कैंसर अस्पताल मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, इन अस्पतालों में प्रतिशत के आधार पर मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल से भी अधिक संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
प्रशासन का मानना है कि समय रहते स्क्रीनिंग, सख्त नियंत्रण और व्यापक जागरूकता के जरिए वाराणसी में ओरल कैंसर के बढ़ते खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।


