स्वागत करेगा ईरान, होर्मुज खोलने पर भी दिया बड़ा संकेत

नई दिल्ली: Iran के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने बुधवार (13 मई 2026) को कहा कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए India जैसी बड़ी शक्तियों द्वारा की गई किसी भी पहल का ईरान स्वागत करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों के आवागमन के लिए नया सेवा और भुगतान-आधारित ढांचा विकसित कर रहा है।
BRICS में ईरान की निंदा की मांग पर जताई नाराजगी
नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान गरीबाबादी ने कहा कि BRICS के एक सदस्य देश द्वारा ईरान की निंदा करने की मांग ने पश्चिम एशिया संकट पर समूह की एकजुट स्थिति बनने से रोक दिया। उनका इशारा साफ तौर पर United Arab Emirates की ओर माना जा रहा है।
उन्होंने कहा,
“हम चाहते हैं कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता सफल हो। दुनिया को यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि ब्रिक्स विभाजित है। एक देश ईरान की निंदा पर जोर दे रहा है।”
भारत की निष्पक्ष भूमिका की तारीफ
गरीबाबादी ने कहा कि ईरान ने कभी अपने पड़ोसी देशों पर हमला नहीं किया, जबकि कुछ देशों ने अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने दिया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद ईरान ने अरब देशों की निंदा की मांग नहीं उठाई।
ईरानी नेता ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा,
“भारत ने हमेशा शांति का समर्थन किया है। वह क्षेत्र में स्थिरता का पक्षधर है। भारत शांति के लिए जो भी पहल करेगा, हम उसका स्वागत करेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत ने “निष्पक्षता” दिखाई है।
BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक पर दुनिया की नजर
यह बयान ऐसे समय आया है जब नई दिल्ली में BRICS Foreign Ministers Meeting 2026 आयोजित हो रही है। बैठक में ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi और रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov समेत कई बड़े नेता शामिल हो रहे हैं।
माना जा रहा है कि बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा पर व्यापक चर्चा होगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या सदस्य देश साझा बयान जारी कर पाते हैं या नहीं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर क्या बोला ईरान?
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित मध्यस्थता में Pakistan की भूमिका पर पूछे गए सवाल पर गरीबाबादी ने कहा कि तेहरान हर तरह के कूटनीतिक प्रयासों का स्वागत करेगा।
उन्होंने कहा,
“पाकिस्तान केवल एक मध्यस्थ है। हम इस तरह के सभी कदमों का स्वागत करेंगे।”
चाबहार परियोजना पर भी दिया बयान
गरीबाबादी ने कहा कि ईरान Chabahar Port परियोजना को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच आगे कैसे बढ़ना है, यह फैसला भारत को करना होगा।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका को युद्ध में रणनीतिक नुकसान हुआ है और वाशिंगटन कूटनीतिक समाधान को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा।
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर ईरान की शर्त
ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाता है, युद्ध समाप्त करता है और तेहरान की जब्त संपत्तियां वापस करता है, तो ईरान Strait of Hormuz को खोलने पर विचार कर सकता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कई भारतीय जहाजों को पहले ही होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जा चुकी है और कुछ अन्य जहाजों को भी स्वदेश लौटने की इजाजत दी जा सकती है।
गरीबाबादी ने कहा कि मौजूदा स्थिति में अगर होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खोल दिया जाता है, तो उसका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।




