उत्तर प्रदेश

सीएम योगी के निर्देश के बाद गोरखपुर से लेकर देवरिया तक दिखने लगा असर

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों की खपत कम करने और सरकारी खर्चों में कटौती की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश और अपील के बाद प्रदेश में ईंधन बचत और काफिले में कटौती का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।

गोरखपुर में बदला वीआईपी मूवमेंट का तरीका

गोरखपुर में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने अब बिना स्कॉर्ट वाहन के आने-जाने की शुरुआत कर दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन संरक्षण केवल आर्थिक जरूरत नहीं बल्कि राष्ट्रीय दायित्व भी है।

वहीं, गोरखपुर के सांसद Ravi Kishan ने भी अपने काफिले को छोटा कर दिया है। अब वे केवल दो वाहनों के साथ ही यात्रा कर रहे हैं और समर्थकों से भी अतिरिक्त गाड़ियों का इस्तेमाल न करने की अपील की है।

प्रशासनिक अधिकारियों में भी बदलाव

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने भी मुख्यमंत्री की अपील के बाद अपने कार्य आवागमन में स्कॉर्ट वाहन हटाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने की तैयारी भी चल रही है, जिसे सप्ताह में एक दिन अपनाया जा सकता है।

सीएम योगी की बड़ी बैठक और निर्देश

Yogi Adityanath ने प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर कई अहम निर्देश दिए हैं:

  • वीआईपी काफिलों में 50% तक कटौती
  • सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’
  • बड़े दफ्तरों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम
  • 50% सरकारी बैठकें वर्चुअल करने की तैयारी
  • कार्यालयों में एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस रखने की सलाह

सीएम ने खुद भी इन निर्देशों का पालन शुरू कर दिया है।

देवरिया और महराजगंज में भी दिखा असर

देवरिया में जिला पंचायत अध्यक्ष गिरीश तिवारी ने सरकारी वाहन छोड़कर ई-रिक्शा और बस से अपने गांव की यात्रा की। उन्होंने लोगों से भी सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की।

वहीं महराजगंज में एक विधायक के ई-रिक्शा से जिला मुख्यालय पहुंचने की खबर भी सामने आई है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर ऊर्जा बचत संदेश को और मजबूती मिली है।

ऊर्जा संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

प्रदेश सरकार का मानना है कि ईंधन बचत केवल आर्थिक नीति नहीं बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। इसी कारण जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को निजी और सरकारी काफिलों में कटौती के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

इस अभियान के तहत आने वाले दिनों में और भी विभागों में सख्ती और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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