गौतमबुद्धनगर में सपा को झटका, विवाद के बाद दो बड़े नेताओं ने छोड़ी पार्टी

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में समाजवादी पार्टी (Akhilesh Yadav) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। ग्रेटर नोएडा में एक कथित विवादित टिप्पणी को लेकर उठे विवाद के बाद पार्टी के दो वरिष्ठ अधिवक्ता नेताओं ने सपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
दादरी रैली के बाद शुरू हुई थी सियासी हलचल
इस साल मार्च में Akhilesh Yadav ने गौतमबुद्धनगर के दादरी में एक बड़ी रैली की थी, जिसे 2027 विधानसभा चुनाव की शुरुआती सियासी तैयारी के तौर पर देखा गया था। इसी रैली से जुड़े स्थानीय नेता राजकुमार भाटी को आयोजन का प्रमुख चेहरा माना गया था।
अब इसी क्षेत्र में पार्टी के भीतर विवाद और असंतोष की खबरें सामने आने लगी हैं।
विवादित टिप्पणी के बाद बढ़ा विरोध
ग्रेटर नोएडा में ब्राह्मण समाज को लेकर कथित अशोभनीय टिप्पणी के बाद सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। इसी विवाद के बीच जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी और सचिव शोभाराम चंदीला ने सपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
प्रेसवार्ता में किया इस्तीफे का ऐलान
दोनों नेताओं ने स्वर्ण नगरी स्थित प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उन्होंने अधिवक्ता समाज के हितों को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है।
मनोज भाटी सपा अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय सचिव भी रह चुके हैं, जबकि शोभाराम चंदीला पार्टी के पुराने कार्यकर्ता माने जाते हैं।
“समाज में विभाजनकारी माहौल बढ़ रहा है” — आरोप
दोनों नेताओं ने कहा कि इस तरह के बयानों से समाज में तनाव और विभाजन की स्थिति पैदा हो रही है। उनका कहना था कि बार एसोसिएशन में बड़ी संख्या में अधिवक्ता ब्राह्मण समाज से जुड़े हैं और ऐसे बयान सभी वर्गों में असंतोष पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अधिवक्ता समाज का काम सामाजिक समरसता बनाए रखना है, ऐसे में किसी भी प्रकार की विवादित टिप्पणी से बचना चाहिए।
चैंबर निर्माण विवाद का भी आरोप
प्रेसवार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सपा से जुड़े कुछ लोगों द्वारा अधिवक्ताओं के लिए बनाए जा रहे चैंबर निर्माण कार्य को बाधित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे अधिवक्ता हितों के खिलाफ बताया।
आगे क्या?
दोनों नेताओं ने संकेत दिया कि वे अब किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि अधिवक्ता समाज के अधिकारों और हितों की लड़ाई पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इस घटनाक्रम से गौतमबुद्धनगर की स्थानीय राजनीति में सपा की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।




