OBC आरक्षण के लिए बनेगा समर्पित आयोग, चुनाव टलने की संभावना

पंचायत चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। चूंकि 26 मई को मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, ऐसे में अब संकेत मिल रहे हैं कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनावों के बाद कराए जा सकते हैं।
समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन
राज्य कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए ‘उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ के गठन को मंजूरी दी है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित यह 5 सदस्यीय आयोग पंचायतों में OBC वर्ग के सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन का अध्ययन करेगा और आरक्षण का नया आधार तैयार करेगा।
आरक्षण की नई व्यवस्था कैसे बनेगी?
आयोग ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर OBC वर्ग की स्थिति का समकालीन अध्ययन करेगा। इसके आधार पर आरक्षण की नई सिफारिशें तय की जाएंगी और लागू की जाएंगी।
संवैधानिक प्रावधानों के तहत पंचायतों में आरक्षण जनसंख्या के अनुपात में तय किया जाता है, लेकिन OBC आरक्षण की सीमा 27% तक निर्धारित है।
अगर सटीक जनसंख्या आंकड़े उपलब्ध नहीं होते, तो आयोग स्वयं सर्वे कर वास्तविक स्थिति का आकलन करेगा।
आयोग की संरचना और कार्यकाल
इस आयोग की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को सौंपी जाएगी। आयोग के अन्य सदस्यों सहित इसका कार्यकाल लगभग 6 महीने का होगा।
कानूनी ढांचा और नियम
पूरी प्रक्रिया उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1947, जिला पंचायत अधिनियम 1961 और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-घ के तहत संचालित होगी। साथ ही 1994 की नियमावली के अनुसार आरक्षण व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
चुनाव पर असर
इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि पंचायत चुनावों की समयसीमा प्रभावित हो सकती है। आरक्षण की नई व्यवस्था तैयार होने तक चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।



