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है जवानी तो इश्क होना है’ रिव्यू: डेविड धवन की कॉमेडी ने लौटाया पुराना बॉलीवुड एंटरटेनमेंट

आज के दौर में जब थिएटर में ज्यादातर ग्रैंड और एक्शन से भरपूर फिल्में देखने को मिलती हैं, ऐसे में निर्देशक डेविड धवन अपनी नई फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के साथ एक बार फिर क्लासिक कॉमेडी का स्वाद लेकर आए हैं।

फिल्म को लेकर दर्शकों और क्रिटिक्स में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, लेकिन यह तय है कि यह फिल्म खुद को गंभीर सिनेमा साबित करने की कोशिश नहीं करती, बल्कि सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन पर फोकस करती है।

कहानी: कन्फ्यूजन और लव ट्रायंगल का मसाला

फिल्म की कहानी पूरी तरह डेविड धवन के पुराने कॉमेडी फॉर्मूले पर आधारित है। इसमें वरुण धवन दो लीड एक्ट्रेसेस—मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े—के बीच फंसे नजर आते हैं।

इसके बाद शुरू होता है गलतफहमियों, कन्फ्यूजन और मजेदार सिचुएशंस का सिलसिला, जो फिल्म को एक हल्की-फुल्की कॉमेडी राइड में बदल देता है। कहानी में नया कुछ नहीं है, लेकिन इसका ट्रीटमेंट इसे एंटरटेनिंग बनाता है।

कैसी है फिल्म?

‘है जवानी तो इश्क होना है’ एक आउट-एंड-आउट कमर्शियल मसाला फिल्म है। यह फिल्म किसी गहरी कहानी या सोशल मैसेज देने की कोशिश नहीं करती।

पहला हाफ तेज रफ्तार से आगे बढ़ता है और कई जगहों पर दर्शकों को हंसाने में सफल रहता है। हालांकि, सेकंड हाफ में कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी धीमी महसूस होती है, लेकिन क्लाइमेक्स इसे फिर से पकड़ लेता है।

डायरेक्शन और राइटिंग

डेविड धवन ने एक बार फिर साबित किया है कि उनकी ताकत जटिल कहानी नहीं बल्कि सरल और मनोरंजक कॉमेडी है।

फिल्म की राइटिंग में वन-लाइनर्स और सिचुएशनल कॉमेडी का अच्छा इस्तेमाल किया गया है। कई जगहों पर यह फिल्म 90 के दशक की क्लासिक धवन फिल्मों जैसे ‘हीरो नंबर 1’ और ‘कुली नंबर 1’ की याद दिलाती है।

एक्टिंग: वरुण धवन का दमदार कॉमिक अवतार

फिल्म का सबसे बड़ा हाइलाइट वरुण धवन का परफॉर्मेंस है। उनकी एनर्जी, कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को मजबूत बनाती है।

मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े ने अपने किरदारों को ठीक तरह से निभाया है और फिल्म में ग्लैमर के साथ संतुलन बनाए रखा है।

सपोर्टिंग कास्ट में जिमी शेरगिल, मौनी रॉय, चंकी पांडे, राकेश बेदी, मनीष पॉल, राजेश कुमार, जॉनी लीवर और राजपाल यादव जैसे कलाकार फिल्म को लगातार एंटरटेनिंग बनाए रखते हैं।

देखें या नहीं?

अगर आप गंभीर और लॉजिकल सिनेमा की तलाश में हैं तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है। लेकिन अगर आप बिना दिमाग लगाए हंसने वाली एक हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्म चाहते हैं, तो ‘है जवानी तो इश्क होना है’ एक अच्छा वीकेंड ऑप्शन हो सकता है।

फिल्म का मकसद साफ है—एंटरटेन करना, और उसी में यह काफी हद तक सफल भी रहती है।

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