सटीक मौसम अलर्ट से टली बड़ी त्रासदी, सीएम योगी ने सुनाया शाकुंभरी मंदिर का किस्सा

लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने आधुनिक तकनीक और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि आज मौसम की भविष्यवाणियां पहले की तुलना में कहीं अधिक सटीक हो गई हैं। इसका सीधा लाभ लोगों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और जन-धन की रक्षा के रूप में देखने को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण उदाहरण साझा करते हुए बताया कि किस तरह समय पर मिले मौसम अलर्ट ने सहारनपुर क्षेत्र में बड़ी जनहानि को टाल दिया। उन्होंने कहा कि Shakumbhari Devi Temple में एक धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कीर्तन में शामिल थे। इसी दौरान मौसम विभाग की ओर से भारी बारिश की सटीक चेतावनी जारी की गई। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
सीएम योगी ने बताया कि यदि समय रहते यह कदम नहीं उठाया जाता तो शिवालिक पर्वत श्रृंखला में होने वाली तेज बारिश का पानी निचले इलाकों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर सकता था। ऐसे हालात में हजारों श्रद्धालुओं की जान खतरे में पड़ सकती थी। उन्होंने कहा कि आधुनिक मौसम विज्ञान और तकनीकी प्रगति के कारण आज ऐसी संभावित आपदाओं से पहले ही लोगों को सतर्क किया जा रहा है, जिससे नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सका है।
पहले अनुमान, अब सटीक पूर्वानुमान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले मौसम विभाग की भविष्यवाणियों को लेकर लोगों के मन में कई बार संदेह रहता था। अक्सर बारिश की संभावना जताई जाती थी लेकिन बारिश नहीं होती थी, या फिर बिना चेतावनी के मौसम अचानक बदल जाता था। लेकिन अब अत्याधुनिक तकनीक, उपग्रहों और वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से मौसम संबंधी जानकारी अधिक सटीक और भरोसेमंद हो गई है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है, जिसका लाभ आम जनता तक पहुंच रहा है।
प्राचीन परंपराओं से आधुनिक विज्ञान तक
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने मौसम पूर्वानुमान के ऐतिहासिक संदर्भ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही मनुष्य मौसम को समझने और उसका अनुमान लगाने का प्रयास करता रहा है। पहले पंचांगों की गणना, प्राकृतिक संकेतों और लोक परंपराओं के आधार पर मौसम का आकलन किया जाता था।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण समाज में पक्षियों की आवाज, हवा की दिशा और अन्य प्राकृतिक संकेतों के आधार पर मौसम का अनुमान लगाने की परंपरा रही है। लेकिन अब वैज्ञानिक उपकरणों और मौसम विभाग की उन्नत प्रणालियों के कारण लोगों को पहले से अधिक विश्वसनीय जानकारी मिल रही है।
आपदा प्रबंधन में मौसम विभाग की बढ़ी भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि सटीक मौसम पूर्वानुमान केवल किसानों के लिए ही नहीं बल्कि आपदा प्रबंधन, परिवहन, धार्मिक आयोजनों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। समय पर मिलने वाले अलर्ट से प्रशासन को आवश्यक तैयारियां करने का अवसर मिलता है और संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में मौसम विज्ञान के क्षेत्र में और अधिक तकनीकी सुधार होंगे, जिससे प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को और कम करने में मदद मिलेगी।




