उत्तर प्रदेश

सीतापुर में NTD प्रशिक्षण: फाइलेरिया, मलेरिया और काला-जार उन्मूलन पर स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण

Sitapur में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम, मलेरिया और राष्ट्रीय काला-जार उन्मूलन अभियान के तहत एक दिवसीय जिला स्तरीय एनटीडी (NTD) प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में हुआ, जिसमें कुल 61 स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लिया।

स्वास्थ्य कर्मियों को दी गई विशेष ट्रेनिंग

कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से आए चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को फाइलेरिया रोग के प्रबंधन, विशेष रूप से MMDP (Morbidity Management and Disability Prevention) पर विस्तृत जानकारी दी गई।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी Anoop Kumar Srivastava ने प्रशिक्षण का उद्घाटन करते हुए कहा कि फाइलेरिया, मलेरिया और काला-जार जैसी बीमारियां आज भी बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान, जागरूकता और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी इन बीमारियों के नियंत्रण में अहम भूमिका निभाते हैं।

बीमारियों के फैलने के कारण और बचाव

जिला एनटीडी नोडल अधिकारी Deependra Verma ने बताया कि:

  • फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है
  • काला-जार बालू मक्खी (Sandfly) के काटने से होता है
  • काला-जार का पूरी तरह इलाज संभव है
  • फाइलेरिया का इलाज नहीं, बल्कि प्रबंधन किया जाता है

उन्होंने बताया कि फाइलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों से सुरक्षा और सर्वजन दवा सेवन अभियान में भाग लेना जरूरी है।

काला-जार नियंत्रण के लिए छिड़काव अभियान

अधिकारी ने यह भी बताया कि काला-जार के मरीज मिलने पर प्रभावित क्षेत्रों में तीन वर्षों तक हर छह महीने में इनडोर रेसिड्यूल स्प्रे (IRS) किया जाता है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

दिव्यांगता प्रमाणपत्र की सुविधा

Deependra Verma ने जानकारी दी कि फाइलेरिया से प्रभावित मरीज अब दिव्यांगता प्रमाणपत्र (Disability Certificate) के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिससे उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

कई संस्थाओं की रही भागीदारी

इस प्रशिक्षण में World Health Organization, PATH, PSI और अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं के राज्य व जिला स्तरीय प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में फाइलेरिया प्रभावित अंगों की देखभाल का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया, ताकि मरीजों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिल सके।

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