ईरान तनाव से दुनिया में खाद संकट गहराया, किसान अब इंसानी पेशाब और मुर्गियों की बीट से बचा रहे फसल

Iran और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक खेती और खाद आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। नाइट्रोजन आधारित यूरिया खाद की सप्लाई प्रभावित होने से दुनिया भर के किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालात ऐसे हैं कि कई किसान अब फसलों को बचाने के लिए इंसानी पेशाब, मुर्गियों की बीट और जैविक कचरे जैसे वैकल्पिक उपायों का सहारा ले रहे हैं।
खाड़ी संकट से प्रभावित हुई यूरिया सप्लाई
दुनिया में इस्तेमाल होने वाली यूरिया खाद का करीब एक-तिहाई हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। लेकिन Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन बाधित होने की वजह से खाद की कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।
इसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ रहा है और किसानों के लिए फसल उत्पादन महंगा होता जा रहा है।
मुर्गियों की बीट की बढ़ी मांग
United Kingdom के किसान अब पारंपरिक यूरिया खाद की जगह जैविक विकल्पों की तरफ बढ़ रहे हैं। गेहूं, जौ और ओट्स की खेती करने वाले किसान मिल्स ने बताया कि पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले कचरे यानी मुर्गियों की बीट की मांग अचानक काफी बढ़ गई है।
उनका कहना है कि लगभग हर किसान अब खाद का कोई न कोई विकल्प तलाश रहा है, हालांकि सिर्फ जैविक उपायों के भरोसे पूरी खेती करना अभी आसान नहीं है।
इंसानी पेशाब से तैयार हो रही जैविक खाद
Toopi Organics नाम की फ्रांसीसी स्टार्टअप इन दिनों काफी चर्चा में है। यह कंपनी स्कूलों और बड़े आयोजनों से इकट्ठा किए गए इंसानी पेशाब से जैविक उत्पाद तैयार कर रही है, जो पौधों की ग्रोथ बढ़ाने में मदद करता है।
कंपनी के अधिकारी फ्रांस्वा जेरार्ड के मुताबिक फरवरी के बाद उनकी बिक्री में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना है कि पारंपरिक खाद की कमी के चलते बायोफर्टिलाइजर की मांग तेजी से बढ़ रही है।
दुनिया भर में बढ़ रहा बायोफर्टिलाइजर का इस्तेमाल
Malaysia, United States और Thailand जैसे देशों में भी किसान अब प्राकृतिक खाद और बायोफर्टिलाइजर की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।
कई कंपनियां बादाम के छिलकों, पशुओं के कचरे और माइक्रोबियल तकनीक के जरिए खाद तैयार कर रही हैं।
पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती अभी चुनौती
हालांकि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक विकल्प फिलहाल पूरी तरह रासायनिक खाद की जगह नहीं ले सकते। Sri Lanka में 2021 में पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती अपनाने की कोशिश के बाद चाय और चावल का उत्पादन काफी गिर गया था।
संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी
United Nations ने चेतावनी दी है कि यदि खाद संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो दुनिया को गंभीर खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। इससे फसल उत्पादन घट सकता है और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।



