यूपी में छोटे अपराधियों के लिए बनेगी ओपन जेल, सीएम योगी बोले- जेल सुधार और पुनर्वास का केंद्र बने

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने राज्य की जेल व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्देश दिया है। सोमवार को कारागार विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों को सिर्फ बंदियों को रखने की जगह नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी जेलों में सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, तकनीकी व्यवस्था और बंदियों के पुनर्वास को और बेहतर किया जाए।
छोटे अपराधियों के लिए बनेगी ‘ओपन जेल’
सीएम योगी ने बैठक में ‘ओपन जेल’ की अवधारणा को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जेल केवल पेशेवर अपराधियों और माफिया के लिए होनी चाहिए, जबकि छोटे अपराधों में शामिल लोगों के लिए ओपन जेल व्यवस्था उपयोगी साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने इसके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। माना जा रहा है कि इससे छोटे अपराधियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में वापसी को बढ़ावा मिलेगा।
समयपूर्व रिहाई में बड़ा इजाफा
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में बंदियों की समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया में तेजी आई है।
- वर्ष 2012-2016 के बीच 273 बंदियों को समयपूर्व रिहाई मिली थी
- वर्ष 2017-2021 के बीच यह संख्या बढ़कर 2882 हुई
- वर्ष 2022-2026 के बीच 3846 बंदियों को रिहा किया गया
इसके अलावा जुर्माना जमा कर रिहा होने वाले कैदियों की संख्या भी लगातार बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ने 75 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों, असाध्य रोगों से पीड़ित बंदियों, बच्चों के साथ जेल में रह रहीं महिला कैदियों और जमानत राशि न जमा कर पाने वाले बंदियों की अलग सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
यूपी की जेलों में घटा ओवरक्राउडिंग
सरकार के अनुसार वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों की क्षमता 58,400 थी, जबकि बंदियों की संख्या 96,383 थी। उस समय ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी।
वर्तमान में प्रदेश में 77 जेलें संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 77,673 हो गई है और बंदियों की संख्या 79,782 है। अब ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 रह गई है।
सात नई जेलें शुरू, कई निर्माणाधीन
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से अब तक चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली समेत सात नए कारागार शुरू किए गए हैं। इससे 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है।
इसके अलावा अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में नई जेलों का निर्माण कार्य जारी है।
मुख्यमंत्री ने बहुमंजिला जेलों के निर्माण को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
जेलों में बढ़ाई गई हाईटेक सुरक्षा
सीएम योगी ने कहा कि जेल सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
प्रदेश की जेलों में वर्ष 2017 से 2026 के बीच:
- 6200 CCTV कैमरे लगाए गए
- 30 ड्रोन कैमरे लगाए गए
- 24 बैगेज स्कैनर स्थापित किए गए
- 84 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए गए
- 195 बॉडी वार्न कैमरे उपलब्ध कराए गए
सभी जेल बैरकों में CCTV निगरानी और वायर फेंसिंग की व्यवस्था की गई है।
बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए।
प्रदेश की कई जेलों में सिलाई, कंबल निर्माण, फिनायल, काष्ठ कला, मसाला, प्रिंटिंग, हैंडीक्राफ्ट, रेडीमेड गारमेंट, LED बल्ब, पॉटरी और कार्पेट उद्योग संचालित किए जा रहे हैं।
प्रदेश की 37 जेलों में ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत उत्पादन इकाइयां भी चलाई जा रही हैं।
योग, खेल और गौशाला पर भी फोकस
बंदियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जेलों में योग, खेलकूद, कृषि और गौसंवर्धन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वर्तमान में प्रदेश की 17 जेलों में गौशालाएं संचालित हैं, जहां 1265 गोवंश संरक्षित हैं।
भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश
कारागार विभाग में 3647 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। वर्ष 2017 से अब तक 4055 नियुक्तियां और 2868 पदोन्नतियां दी जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।



