Supreme Court News: कानून छात्रों की उपस्थिति नियम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

Supreme Court of India ने कानून के छात्रों की अनिवार्य उपस्थिति को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए Delhi High Court के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि केवल कम उपस्थिति के आधार पर छात्रों को परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता।
BCI की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने Bar Council of India (BCI) की याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को 21 जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
साथ ही अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के विवादित फैसले के पैरा 249 के प्रभाव और संचालन पर फिलहाल रोक लगा दी है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 2016 के एक दुखद घटनाक्रम से जुड़ा है, जिसमें Amity University के एक छात्र को कम उपस्थिति के कारण परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली थी। बाद में छात्र ने आत्महत्या कर ली थी।
इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में लिया था और मार्च 2017 में इसे दिल्ली हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिया गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि कानूनी शिक्षा सिर्फ कक्षा में बैठने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अदालत ने माना कि मूट कोर्ट, सेमिनार, मॉक पार्लियामेंट, वाद-विवाद और अन्य कानूनी गतिविधियां भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि केवल उपस्थिति के आधार पर बनाए गए सख्त नियम छात्रों की रचनात्मकता और स्वतंत्र सोच को प्रभावित कर सकते हैं।
अब क्या होगा आगे?
सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट का वह निर्देश लागू नहीं रहेगा। अब मामले की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि कानून की पढ़ाई में अनिवार्य उपस्थिति के नियमों को किस सीमा तक लागू किया जा सकता है।




