उत्तर प्रदेश

जस्टिस यशवंत वर्मा के इस्तीफे के बाद भी सरकार सख्त, महाभियोग पर चर्चा संभव

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के इस्तीफे के बावजूद केंद्र सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाने के मूड में दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, अब तक उनके इस्तीफे को औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है और सरकार आगामी मॉनसून सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा करा सकती है।

जांच समिति ने स्पीकर को सौंपी रिपोर्ट

जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच कर रही विशेष समिति अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंप चुकी है। हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि समिति ने आरोपों को गंभीर माना है।

बताया जा रहा है कि सरकार इस मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना चाहती है ताकि न्यायपालिका में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर सख्त संदेश दिया जा सके।

जले हुए नोट मिलने के बाद शुरू हुई कार्रवाई

पूरा मामला उस समय चर्चा में आया था जब जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास में आग लगने के बाद कथित तौर पर भारी मात्रा में जले हुए नोट बरामद किए गए थे।

उस समय वे दिल्ली हाई कोर्ट में जज थे। बाद में उन्हें उनके मूल कोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेज दिया गया था।

तीन सदस्यीय समिति का गठन

लोकसभा स्पीकर ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत पिछले साल 12 अगस्त को तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था।

तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा गठित आंतरिक समिति ने भी निष्कर्ष निकाला था कि जिस स्टोर रूम से कथित नकदी मिली, उस पर जस्टिस वर्मा का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण था।

संसद में हो सकती है तीखी बहस

सूत्रों के अनुसार, संसद के आगामी मॉनसून सत्र में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो सकती है। रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में पेश किए जाने की संभावना है।

200 से ज्यादा सांसदों ने किया था समर्थन

बताया जा रहा है कि जुलाई 2025 में 200 से अधिक सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों को हटाने की प्रक्रिया संसद के जरिए ही पूरी होती है। ऐसे में इस्तीफे के बावजूद सरकार इस मामले को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है।

इस्तीफे के बाद भी बना हुआ है नाम

दिलचस्प बात यह है कि इस्तीफा देने के बावजूद जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम अभी भी इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों की सूची में दर्ज बताया जा रहा है। वे 5 जनवरी 2031 को सेवानिवृत्त होने वाले थे।

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