अखिलेश यादव और ब्रजेश पाठक में तीखी जुबानी जंग, ‘PDA’ और सरकार की नाकामी पर बढ़ा सियासी टकराव

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों नेताओं के बीच ‘PDA फॉर्मूला’, सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर लगातार तीखे बयान सामने आ रहे हैं।
चर्चा में रहने की राजनीति पर ब्रजेश पाठक का जोर
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक अक्सर अपने बयानों और राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। हाल ही में उन्होंने समाजवादी पार्टी के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रणनीति करार दिया था। उनके इस बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई।
पाठक के इस बयान पर समाजवादी पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई, जिससे विवाद और बढ़ गया।
अखिलेश यादव का पलटवार
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ब्रजेश पाठक पर निशाना साधते हुए उन्हें “नाकाम और बेकार” बताया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के रूप में ब्रजेश पाठक का प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा है, इसलिए वह अब मीडिया और बयानबाजी में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में बिजली संकट और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति खराब है, जबकि सरकार के मंत्री इंटरव्यू और राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त हैं।
‘PDA’ बनाम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला—पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा रहा। दूसरी ओर भाजपा इसे जातीय समीकरणों पर आधारित राजनीतिक रणनीति बताती रही है।
ब्रजेश पाठक ने भी PDA पर सवाल उठाते हुए इसे “राजनीतिक घराने का एजेंडा” बताया था। इसके बाद दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया।
बयानबाजी से बढ़ा राजनीतिक तापमान
ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के बयानों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष अनावश्यक आलोचना कर रहा है। उन्होंने कहा कि संवाद लोकतंत्र का हिस्सा है और राजनीतिक बहस को व्यक्तिगत हमलों में नहीं बदलना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके बयानों से किसी को “मिर्ची लगती है” तो वह उनकी जिम्मेदारी नहीं है।
2027 चुनाव से पहले सियासी रणनीति तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी दल अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में बयानबाजी और सियासी हमले और तेज हो सकते हैं।
भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ही अपने-अपने सामाजिक समीकरणों और जनाधार को साधने की कोशिश में लगे हुए हैं।
सोशल मीडिया पर भी गरमाई बहस
दोनों नेताओं के बयानों के बाद सोशल मीडिया पर भी समर्थकों के बीच बहस तेज हो गई है। एक ओर भाजपा समर्थक सरकार के कामकाज का बचाव कर रहे हैं, वहीं सपा समर्थक सरकार पर विफलता के आरोप लगा रहे हैं।



