उत्तर प्रदेश

यूपी 2027 चुनाव से पहले सपा–कांग्रेस गठबंधन में सीटों पर खींचतान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर शुरुआती चर्चा शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस करीब 120 सीटों की मांग कर सकती है, जबकि सपा 80 सीटों के आसपास समझौते के पक्ष में दिख रही है।

दोनों दल इंडिया गठबंधन के तहत एक साथ चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में भी सपा और कांग्रेस ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, जबकि 2022 में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबला किया था।

2017 में कैसा रहा था सपा–कांग्रेस गठबंधन का प्रदर्शन?

2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सपा के साथ मिलकर लगभग 125 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उसे 7 सीटों पर जीत मिली थी और करीब 49 सीटों पर वह दूसरे स्थान पर रही थी।

जीतने वाली सीटों में बेहट, सहारनपुर, हरचंदपुर, रायबरेली, कानपुर कैंट, रामपुर खास और तमकुही राज शामिल थीं। हालांकि कई सीटों पर कांग्रेस बीजेपी और अन्य दलों से पीछे रह गई थी।

उस चुनाव में कई सीटों पर सपा और कांग्रेस के बीच तालमेल की कमी भी देखने को मिली थी, जिसका सीधा फायदा बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को मिला था।

2022 में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर

2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अलग चुनाव लड़ा था और प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। पार्टी केवल 2 सीटें जीत सकी और कुछ ही सीटों पर दूसरे स्थान पर रह पाई। इससे यूपी में उसकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठे थे।

2027 से पहले गठबंधन की रणनीति पर नजर

अब 2027 चुनाव को देखते हुए दोनों दल फिर से साथ आने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे पर सहमति बनना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दोनों दलों के बीच तालमेल मजबूत नहीं रहा, तो इसका असर सीधे चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर शुरुआती बातचीत ने यूपी की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि गठबंधन किस फॉर्मूले पर आगे बढ़ता है और क्या दोनों दल एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ मजबूत चुनौती पेश कर पाएंगे या नहीं।

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