मुरादाबाद में हैरान करने वाला मामला: दो साल पहले मर चुके व्यक्ति पर पुलिस ने की कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के Moradabad से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां Pakbada Police Station की पुलिस ने शांतिभंग की कार्रवाई में एक ऐसे व्यक्ति का नाम शामिल कर दिया, जिसकी दो साल पहले ही मौत हो चुकी थी।
पड़ोसी विवाद में सामने आई बड़ी लापरवाही
मामला पाकबड़ा थाना क्षेत्र की नई बस्ती, कैलसा रोड का है, जहां दो पड़ोसी परिवारों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ शांति भंग की आशंका में कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम कोर्ट भेजी।
आरोप है कि जांच अधिकारी उपनिरीक्षक विनीत कुमार ने अपनी रिपोर्ट में नरेश नामक व्यक्ति को भी पक्षकार बनाया और दावा किया कि उन्होंने संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं।
कोर्ट में खुली पोल
जब मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में नरेश को पेश होने के लिए पुकारा गया, तब उसके परिवार ने बताया कि नरेश की बीमारी के चलते दो वर्ष पहले ही मृत्यु हो चुकी है। यह सुनकर अदालत में मौजूद लोग भी हैरान रह गए।
इसके बाद सवाल उठने लगे कि जब व्यक्ति जीवित ही नहीं था, तो पुलिस ने उसका नाम रिपोर्ट में कैसे शामिल किया और उसके बयान दर्ज करने का दावा कैसे किया।
एसएसपी ने किया तत्काल एक्शन
मामले को गंभीरता से लेते हुए Satpal Antil ने आरोपी दरोगा विनीत कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई एएसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
विभागीय जांच के आदेश
पुलिस विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। अब यह पता लगाया जाएगा कि यह महज लापरवाही थी या फिर जांच प्रक्रिया में जानबूझकर तथ्यों की अनदेखी की गई।
पुलिस जांच पर उठे सवाल
इस घटना ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और कागजी कार्यवाही की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी पुलिस की कार्यशैली को लेकर चर्चा तेज हो गई है।




