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Vibrant Village Programme: लद्दाख का चुमुर गांव बनेगा आत्मनिर्भर, पर्यटन और रोजगार का नया केंद्र

लेह: भारत-चीन सीमा के करीब स्थित लद्दाख का छोटा सा चुमुर (Chumur) गांव जल्द ही देश का पहला ‘मॉडल सीमा गांव’ (Model Border Village) बनने जा रहा है। महज 91 लोगों और 24 परिवारों वाले इस गांव को केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Village Programme – VVP) योजना के तहत विकसित किया जाएगा।

बुधवार को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 16,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस गांव में परियोजना की आधारशिला रखी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों को आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से मजबूत और पर्यटन के लिए आकर्षक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

भारत-चीन सीमा के पास स्थित है चुमुर गांव

चुमुर गांव लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के बेहद करीब स्थित है और देश की सबसे दूरस्थ सीमाई बस्तियों में गिना जाता है। यहां कुल 24 परिवार रहते हैं और अधिकांश लोग पश्मीना बकरियों के पालन से अपनी आजीविका चलाते हैं।

सीमावर्ती क्षेत्र में होने के कारण यह गांव रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार का उद्देश्य यहां आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराकर स्थानीय आबादी को गांव में ही रोजगार और बेहतर जीवन देना है, ताकि पलायन को रोका जा सके।

क्या है वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम?

केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम सीमावर्ती गांवों के विकास पर केंद्रित एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य दूरदराज के इलाकों में बुनियादी ढांचे, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है।

सरकार का मानना है कि सीमा क्षेत्रों का विकास केवल सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर बनाना जरूरी है।

24 परिवारों को मिलेंगे मौसम के अनुकूल आधुनिक घर

लद्दाख प्रशासन के मुताबिक, गांव के सभी 24 परिवारों को जलवायु-अनुकूल (Climate Resilient) घर उपलब्ध कराए जाएंगे। इन घरों में विशेष थर्मल इंसुलेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे अत्यधिक ठंड और कठोर मौसम से सुरक्षा मिल सके।

इसके अलावा गांव में होमस्टे सुविधाओं को भी विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी और पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

चुमुर गांव को केवल एक सीमाई बस्ती के रूप में नहीं बल्कि ईको-टूरिज्म और ग्रामीण पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित करने की योजना है। सरकार का मानना है कि बेहतर बुनियादी सुविधाओं और पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

सीमाई क्षेत्रों में पलायन रोकने की बड़ी पहल

पिछले कुछ वर्षों में सीमावर्ती इलाकों से लोगों के पलायन को रोकना सरकार की प्राथमिकता बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीमाओं पर बसे गांव आर्थिक रूप से मजबूत और सुविधाओं से लैस होंगे तो वहां की आबादी बनी रहेगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

चुमुर को मॉडल बॉर्डर विलेज के रूप में विकसित करने की पहल इसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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