उत्तर प्रदेश

Varanasi News: नमो घाट पर दर्दनाक हादसा, गंगा में डूबने से दो छात्रों की मौत

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित नमो घाट पर बुधवार को दर्दनाक हादसा हो गया। बिहार से परीक्षा देने आए तीन किशोरों में से दो की गंगा में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद घाट पर अफरा-तफरी मच गई, जबकि परिजनों में मातम का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, तीनों छात्र बिहार के रहने वाले थे और परीक्षा देने के लिए वाराणसी आए थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद वे शहर के प्रसिद्ध नमो घाट घूमने पहुंचे थे। इसी दौरान घाट पर बनी सूर्य नमस्कार आकृति के पास पहुंचने पर दो छात्रों का संतुलन बिगड़ गया और वे गंगा नदी में गिर गए।

मदद की गुहार लगाता रहा तीसरा छात्र

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों छात्रों को पानी में गिरता देख उनके साथ मौजूद तीसरे किशोर ने शोर मचाकर लोगों से मदद मांगी। आसपास मौजूद लोगों ने बचाव की कोशिश की, लेकिन तब तक दोनों युवक गहरे पानी में जा चुके थे।

सूचना मिलते ही पुलिस, जल पुलिस और NDRF की टीम मौके पर पहुंची। घंटों चले सर्च ऑपरेशन के बाद दोनों छात्रों के शव गंगा से बरामद किए गए।

बिहार में परिजनों तक पहुंची दुखद खबर

घटना की जानकारी मिलते ही मृतकों के परिजनों को सूचित किया गया। हादसे की खबर सुनकर परिवार में कोहराम मच गया। परिजन तत्काल वाराणसी के लिए रवाना हो गए हैं।

पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

नमो घाट पर फिर उठा सुरक्षा व्यवस्था का सवाल

वाराणसी का नमो घाट शहर के सबसे आधुनिक और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में इस हादसे ने घाटों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चेतावनी बोर्ड के बावजूद नहीं रुक रहे हादसे

जल पुलिस, नगर निगम और जिला प्रशासन की ओर से घाटों पर चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा निर्देश और अन्य इंतजाम किए गए हैं। इसके बावजूद गंगा घाटों पर डूबने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पर्यटक सेल्फी लेने या घाट के किनारों तक जाने के दौरान सावधानी नहीं बरतते, जिसके कारण हादसे हो जाते हैं।

बढ़ रही हैं डूबने की घटनाएं

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी के गंगा घाटों पर डूबने की घटनाओं में कमी आने के बजाय हाल के वर्षों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा उपायों के साथ-साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है, ताकि ऐसे दर्दनाक हादसों को रोका जा सके।

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