तमिलनाडु के कोयंबटूर में मिड-डे मील खाने से 33 से ज्यादा छात्र बीमार, अस्पताल में भर्ती

तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के ओडक्कलपलायम इलाके में एक सरकारी मिडिल स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 33 से अधिक छात्र बीमार पड़ गए, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सभी प्रभावित बच्चों को इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मिड-डे मील खाने के बाद बिगड़ी बच्चों की तबीयत
यह घटना रविवार की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, छात्रों ने रोज की तरह स्कूल में परोसा गया मिड-डे मील खाया था। भोजन करने के कुछ ही समय बाद कई बच्चों को उल्टी, पेट दर्द, चक्कर और कमजोरी की शिकायत होने लगी।
कुछ ही देर में बीमार छात्रों की संख्या बढ़ने लगी, जिससे स्कूल प्रशासन और शिक्षकों में अफरा-तफरी मच गई।
बीमार छात्रों को अस्पताल में कराया गया भर्ती
स्कूल प्रशासन ने तुरंत स्थानीय प्रशासन और अभिभावकों को सूचना दी।बीमार बच्चों को पहले नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद कुछ छात्रों को हालत गंभीर होने पर अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों में रेफर किया गया।राहत की बात यह है कि फिलहाल सभी छात्रों की हालत स्थिर बताई जा रही है और किसी की जान को खतरा नहीं है।
मिड-डे मील के सैंपल जांच के लिए भेजे गए
घटना की सूचना मिलते ही सुल्तानपेट ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।
अधिकारियों ने स्कूल के किचन, भोजन तैयार करने की प्रक्रिया और इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच की।
इसके साथ ही मिड-डे मील के भोजन के सैंपल लेकर उन्हें लैब में जांच के लिए भेजा गया है, ताकि बच्चों की तबीयत खराब होने की असली वजह का पता लगाया जा सके।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने मिड-डे मील की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।वहीं, सुल्तानपेट पुलिस ने भी मामले की अलग से जांच शुरू कर दी है।
अभिभावकों में नाराजगी
इस घटना के बाद अभिभावकों में गुस्सा देखा जा रहा है। उनका कहना है कि मिड-डे मील योजना बच्चों के पोषण के लिए शुरू की गई थी, लेकिन ऐसी घटनाएं इसकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि बच्चों को बेहतर इलाज दिया जा रहा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।


