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सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का बड़ा बयान, कहा– विदेशी को वोट देने से रोकना हमारा संवैधानिक कर्तव्य

नई दिल्ली:वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने बड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। आयोग ने मंगलवार को शीर्ष अदालत को बताया कि संविधान ने उसे यह अधिकार और कर्तव्य सौंपा है कि वह वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने से पहले किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता की जांच करे, ताकि कोई भी विदेशी भारत में वोट न डाल सके।

इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष सुनवाई जारी है। अदालत में गुरुवार को भी इस मुद्दे पर बहस होगी।

नागरिकता जांच हमारे दायरे में नहीं— दलील खारिज

चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने याचिकाकर्ताओं की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि नागरिकता का निर्धारण चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और SIR के दौरान केवल आधार विवरण ही पर्याप्त होने चाहिए।

द्विवेदी ने कहा कि संविधान सभा की बहसों से स्पष्ट है कि संविधान निर्माताओं का इरादा था कि सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए

वोटर लिस्ट में विदेशी शामिल न हों— EC

राकेश द्विवेदी ने कहा,
“संविधान के लागू होने के समय से ही यह साफ था कि वोटर लिस्ट तैयार करने वाले अधिकारी नागरिकता की जांच करेंगे और जो नागरिक नहीं हैं, उन्हें सूची से बाहर रखा जाएगा। बाद में अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को सभी चुनावों के निर्देशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण की पूर्ण शक्तियां दी गईं।”

उन्होंने बताया कि अनुच्छेद 324 को अनुच्छेद 326 के साथ पढ़ने पर आयोग को नागरिकता सत्यापन का अधिकार मिलता है

SIR के बिना निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि
“जब तक वोटर लिस्ट का समय-समय पर गहन संशोधन नहीं किया जाएगा, तब तक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना संभव नहीं है।”

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चाहे SIR प्रक्रिया से एक विदेशी सामने आए या सैकड़ों, लक्ष्य यही है कि एक भी गैर-नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो

वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब नागरिकता खत्म होना नहीं

याचिकाकर्ताओं की इस दलील पर कि सिर्फ केंद्र सरकार ही नागरिकता की जांच कर सकती है, आयोग ने कहा कि
चुनाव आयोग किसी की नागरिकता खत्म नहीं करता, बल्कि केवल यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने के योग्य है या नहीं।

द्विवेदी ने कहा,
“SIR प्रक्रिया के कारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत किसी की नागरिकता समाप्त नहीं होती। सिर्फ वोटर लिस्ट से नाम हटाया जा सकता है। नागरिकता खत्म करने या किसी को विदेशी घोषित करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।”

मौत, स्थान परिवर्तन और नए वोटर भी होंगे शामिल

चुनाव आयोग ने बताया कि SIR के दौरान मृत मतदाताओं, स्थान बदल चुके लोगों और नए योग्य वोटर्स को लेकर भी समीक्षा की जाएगी। रिवीजन की प्रकृति मौजूदा परिस्थितियों और आयोग के विवेक पर निर्भर करेगी।

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