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UGC New Rules पर बवाल: विरोध के बीच BJP नेता निशिकांत दुबे बोले— ‘मोदी है तो मुमकिन है

नई दिल्ली।यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में विरोध की खबरें सामने आ रही हैं। छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के विरोध के बीच अब इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “मोदी है तो मुमकिन है, UGC नोटिफिकेशन से जुड़ी सभी भ्रांतियों को दूर किया जाएगा।”

संविधान सभी को समान मानता है: निशिकांत दुबे

निशिकांत दुबे ने अपनी पोस्ट में लिखा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग में कोई भेदभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है।

बीजेपी सांसद ने यह भी कहा कि सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण केवल और केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से मिला। उन्होंने लिखा कि 1990 में मंडल आयोग लागू होने के बाद कई राजनीतिक दल सत्ता में आए, लेकिन “न्याय अगर किसी ने दिया तो वह मोदी जी हैं।”
उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि UGC से जुड़ी भ्रांतियां भी जल्द समाप्त होंगी।

‘कानून के लागू होने में भेदभाव क्यों?’: प्रियंका चतुर्वेदी

इस मुद्दे पर शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार से सवाल किए। उन्होंने कहा कि कैंपस में किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव गलत है और देश पहले ही इसके गंभीर दुष्परिणाम देख चुका है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने पूछा कि क्या कानून को समावेशी नहीं होना चाहिए और सभी को समान संरक्षण नहीं मिलना चाहिए?
उन्होंने सवाल उठाया कि:

  • कानून लागू करने में भेदभाव क्यों है?
  • झूठे मामलों की स्थिति में क्या होगा?
  • दोष का निर्धारण कैसे किया जाएगा?
  • भेदभाव को शब्दों, कार्यों या धारणाओं से कैसे परिभाषित किया जाएगा?

उन्होंने कहा कि कानून की प्रक्रिया स्पष्ट, सटीक और सभी के लिए समान होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि UGC की इस अधिसूचना को या तो वापस लिया जाए या उसमें जरूरी संशोधन किया जाए।

चंद्रशेखर आजाद का तीखा बयान

भीम आर्मी चीफ और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि UGC नियमों का विरोध वही लोग कर रहे हैं जो जातिगत शोषण को बनाए रखना चाहते हैं।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर चंद मुट्ठीभर लोगों के दबाव में फैसला वापस लिया गया तो देश के 85 प्रतिशत लोग सड़कों पर उतरेंगे।

‘सवर्ण समाज नाराज़ नहीं है’: केशव प्रसाद मौर्य

यूजीसी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सवर्ण समाज नाराज़ नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य किसी वर्ग को पीछे करना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से पिछड़े तबकों को आगे बढ़ाना है।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सामाजिक न्याय की प्रक्रिया में संतुलन आवश्यक है और सरकार उसी दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने दावा किया कि किसी भी समाज के साथ अन्याय नहीं किया जा रहा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज हो गई हैं।

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