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महिला आरक्षण: मीसा भारती का बयान: “हम समर्थन करते हैं, लेकिन संशोधन पर आपत्ति”

भारत की संसद के विशेष सत्र में गुरुवार (16 अप्रैल) से महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पेश कर दिया गया है। सरकार ने इस मुद्दे पर तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है, जिसके बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।


परिसीमन को लेकर विपक्ष का विरोध

विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण के साथ परिसीमन विधेयक लाए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया जल्दबाजी में और बिना पर्याप्त सहमति के की जा रही है।


मीसा भारती का बयान: “हम समर्थन करते हैं, लेकिन संशोधन पर आपत्ति”

राष्ट्रीय जनता दल सांसद मीसा भारती ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का विरोध नहीं करती, लेकिन इसमें किए जा रहे संशोधनों और परिसीमन के प्रावधानों पर आपत्ति है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले जातिगत जनगणना के आधार पर परिसीमन की बात कही थी, लेकिन अब इसमें बदलाव किया जा रहा है।


SC, ST और OBC महिलाओं के आरक्षण की मांग

मीसा भारती ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिले।

उनका कहना है कि महिला आरक्षण सभी वर्गों के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।


सरकार का पक्ष: जनगणना से जुड़ा तर्क

सरकार का तर्क है कि यदि नई जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया तो आरक्षण लागू होने में देरी हो सकती है, जबकि मौजूदा ढांचे में इसे समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।


महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है। इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है।


निष्कर्ष

भारत की संसद में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा तेज है। जहां सरकार इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष संशोधन और परिसीमन को लेकर सवाल उठा रहा है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में और राजनीतिक रूप ले सकता है।

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