महिला आरक्षण विवाद पर सियासत गरम: अखिलेश यादव की पार्टी और बीजेपी आमने-सामने

लखनऊ/नई दिल्ली: महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को संसद से मंजूरी न मिलने के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। इसी बीच बीजेपी नेता अपर्णा यादव द्वारा सपा और कांग्रेस का झंडा जलाने की घटना ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
सपा का तीखा पलटवार
समाजवादी पार्टी के एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “छोटी मानसिकता वाला कृत्य” बताया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से महिला अधिकारों और आरक्षण के समर्थन में रही है और इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद के पीछे सत्ताधारी दल की राजनीतिक मानसिकता है और झंडा जलाने जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं।
FIR की मांग
सपा एमएलसी ने कहा कि इस तरह के कृत्य पर FIR दर्ज होनी चाहिए, क्योंकि यह समाज में नफरत और तनाव बढ़ाने वाला कदम है। उन्होंने इसे “घृणित मानसिकता” का प्रतीक बताया।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
अजय राय ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के नाम पर राजनीति की जा रही है और विरोध की सीमाएं पार करना गलत है।
अखिलेश यादव का बयान
अखिलेश यादव ने सीधे नाम लिए बिना कहा कि रंग और प्रतीक भावनाओं से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादियों का लाल रंग क्रांति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है, और किसी भी रंग या प्रतीक का अपमान नहीं होना चाहिए।
राजनीतिक तनाव बढ़ा
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर पहले से ही सत्ता और विपक्ष में मतभेद थे, लेकिन अब झंडा जलाने की घटना ने सियासी तनाव और बढ़ा दिया है। दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी से राजनीतिक माहौल और गरमाता दिख रहा है।




