Allahabad High Court: मृत व्यक्ति के नाम पर अतिक्रमण नोटिस पर सवाल, तेल कंपनी से मांगा शपथपत्र

Allahabad High Court ने एक अहम मामले में तेल कंपनी को निर्देश दिया है कि वह शपथपत्र (affidavit) दाखिल कर यह स्पष्ट करे कि वर्ष 1996 में मृत व्यक्ति पर अतिक्रमण का आरोप कैसे लगाया गया।
अदालत ने इस मामले में प्रथम दृष्टया नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
प्रयागराज निवासी याचिकाकर्ता महेंद्र कुमार ने 16 अगस्त 2025 और 15 अक्टूबर 2025 को जारी किए गए नोटिस को चुनौती दी है।
उनका कहना है कि:
- नोटिस उनके पिता के नाम पर जारी किया गया
- जबकि उनके पिता का निधन 11 अक्टूबर 1996 में हो चुका था
- ऐसे में मृत व्यक्ति पर अतिक्रमण का आरोप पूरी तरह गलत है
अदालत में क्या दलीलें दी गईं?
सुनवाई के दौरान:
- याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि नोटिस बिना तथ्यात्मक जांच के जारी हुआ
- केंद्र सरकार और तेल कंपनी की ओर से कहा गया कि पाइपलाइन क्षेत्र में अतिक्रमण की सूचना मिलने पर नोटिस भेजा गया
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
Allahabad High Court ने सवाल उठाया:
जब व्यक्ति का निधन 1996 में हो चुका है, तो यह कैसे माना गया कि अतिक्रमण उसी व्यक्ति ने किया?
तेल कंपनी को क्या निर्देश मिला?
अदालत ने तेल कंपनी को आदेश दिया कि वह अपने शपथपत्र में स्पष्ट करे:
- अतिक्रमण की जानकारी कैसे मिली
- जांच की प्रक्रिया क्या थी
- मृत व्यक्ति का नाम नोटिस में क्यों शामिल किया गया
- सत्यापन किस आधार पर किया गया
अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 मई 2026 तय की गई है।
निष्कर्ष
Allahabad High Court का यह आदेश प्रशासनिक प्रक्रियाओं और नोटिस जारी करने की प्रणाली पर महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है, खासकर तब जब नोटिस मृत व्यक्ति के नाम पर जारी किया गया हो।



