प्रतीक यादव के निधन में नया अपडेट: अस्पताल प्रशासन ने बताया ‘मृत अवस्था में लाया गया था’, पोस्टमार्टम पर टिकी निगाहें

Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे और Akhilesh Yadav के सौतेले भाई प्रतीक यादव के निधन के बाद मामले को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं।
प्रतीक यादव, जो लगभग 38 वर्ष के थे, का बुधवार सुबह लखनऊ में निधन हो गया। इस बीच सिविल अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उन्हें अस्पताल में पहले से ही मृत अवस्था में लाया गया था।
‘मृत अवस्था में लाया गया था’ — अस्पताल का बयान
सिविल अस्पताल के निदेशक डॉक्टर जी.सी. गुप्ता ने बताया कि सुबह करीब 5:30 बजे प्रतीक के घर से मदद मांगी गई थी। इसके बाद मेडिकल टीम को मौके पर भेजा गया और उन्हें तुरंत अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि मृत्यु की पुष्टि के बाद पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दे दी गई थी और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं।
‘जहर’ की आशंका पर क्या बोले डॉक्टर?
कुछ रिपोर्ट्स में जहर दिए जाने की आशंका को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉक्टर जी.सी. गुप्ता ने कहा कि अभी किसी भी तरह की पुष्टि नहीं की जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौत का असली कारण केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही पता चलेगा।
उन्होंने कहा,
“पोस्टमार्टम से पहले किसी भी तरह की अटकलें लगाना सही नहीं होगा।”
पहले भी बिगड़ी थी तबीयत
सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव को 30 अप्रैल को गंभीर हालत में लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ था, लेकिन बाद में वह डॉक्टरों को बिना बताए घर लौट आए थे।
बताया जा रहा है कि वह फेफड़ों की गंभीर बीमारी पल्मोनरी एम्बोलिज्म से भी पीड़ित थे, जिसमें फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जम जाता है और स्थिति जानलेवा हो सकती है।
घर से अस्पताल तक का घटनाक्रम
रिपोर्ट्स के अनुसार, सुबह करीब 4:55 बजे प्रतीक यादव के घर में उनकी तबीयत बिगड़ी। इसके बाद चालक ने अस्पताल से मदद मांगी। मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और उन्हें सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नजर
अब पूरे मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सबसे अहम माना जा रहा है। पुलिस और प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और हर एंगल से मामले की पड़ताल की जा रही है।




