Vat Savitri Vrat 2026: ज्येष्ठ अमावस्या पर सुहागिन महिलाएं रखेंगी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 16 मई, शनिवार को मनाया जा रहा है।
इस बार शनिवार होने के कारण शनि जयंती का विशेष संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
व्रत की तिथि और समय
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 15 मई 2026 की दोपहर से शुरू होकर 16 मई की शाम तक रहेगी। महिलाएं अपनी सुविधा अनुसार इस दिन पूजा कर सकती हैं, लेकिन सुबह का समय अधिक शुभ माना गया है।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार वट सावित्री व्रत की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है।
- शुभ मुहूर्त: सुबह 07:15 बजे से 10:45 बजे तक
- इस समय वट वृक्ष की पूजा, परिक्रमा और सावित्री-सत्यवान कथा का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त में भी विशेष लाभ
यदि कोई महिला सुबह पूजा न कर पाए, तो अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना भी शुभ माना गया है।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक
इस समय की गई पूजा को विशेष फलदायी और सफल माना जाता है।
वट सावित्री व्रत की पूजा विधि
व्रत की सफलता के लिए महिलाएं सुबह स्नान कर नए वस्त्र धारण कर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। पूजा में शामिल सामग्री:
- सात प्रकार के अनाज
- भीगे हुए चने
- फल और मिठाई
- कच्चा सूत या रक्षा सूत्र
वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए “ॐ सती सावित्र्यै नमः” मंत्र का जाप किया जाता है। सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना और पढ़ना भी इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वट वृक्ष का धार्मिक महत्व
वट वृक्ष को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना गया है। यह दीर्घायु, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक है।
मान्यता है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है और पति की आयु लंबी होती है। साथ ही इस बार शनि जयंती के संयोग के कारण वट वृक्ष में जल चढ़ाना और दीपक जलाना शनि दोषों से राहत देने वाला माना गया है।
व्रत का समापन और दान का महत्व
पूजा के बाद सुहागिन महिलाएं व्रत का पारण सात्विक भोजन से करती हैं। साथ ही सुहाग सामग्री का दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।




