उत्तर प्रदेश

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मेनका गांधी का बयान, कहा—“आदेश व्यवहारिक नहीं”

मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अदालत के आदेश में कोई नई बात नहीं है, और इसे जमीन पर लागू करना बेहद मुश्किल है।

“3 लाख करोड़ रुपये चाहिए” — मेनका गांधी का दावा

मेनका गांधी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिन निर्देशों का उल्लेख किया गया है, उन्हें लागू करने के लिए देशभर में भारी इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की जरूरत होगी।

उनके अनुसार, इस व्यवस्था को लागू करने में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है, जो वर्तमान परिस्थितियों में सरकार के लिए संभव नहीं है।

कानून पहले से मौजूद, लेकिन प्रक्रिया कठिन

उन्होंने यह भी कहा कि जिन मामलों में गंभीर या खतरनाक आवारा कुत्तों को हटाने या नियंत्रित करने की बात की जा रही है, उसके लिए पहले से कानून मौजूद हैं।

लेकिन उनका कहना है कि इन कानूनों के साथ तय प्रक्रियाएं और नियम जुड़े हुए हैं, इसलिए इन्हें सीधे लागू करना आसान नहीं होता।

राज्यों के प्रदर्शन पर टिप्पणी

मेनका गांधी ने अलग-अलग राज्यों के कामकाज का जिक्र करते हुए कहा कि अधिकांश राज्यों ने आवारा पशुओं के प्रबंधन पर पर्याप्त काम नहीं किया है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी राज्य ने बेहतर काम किया है तो वह उत्तर प्रदेश है।

सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला क्या कहता है?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में दायर कई याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि:

  • नागरिकों के सम्मान के साथ जीने के अधिकार में सुरक्षा का अधिकार भी शामिल है
  • राज्यों और स्थानीय निकायों को बुनियादी ढांचा मजबूत करना होगा
  • पशु कल्याण बोर्ड के दिशा-निर्देशों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज की गईं

निष्कर्ष

मामला अब एक बार फिर प्रशासनिक क्षमता, बजट और पशु-मानव सुरक्षा संतुलन की बहस में बदल गया है, जहां अदालत के सख्त रुख और विशेषज्ञों की व्यवहारिक चुनौतियों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं।

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