एग फ्रीजिंग क्या है और अगर इसका इस्तेमाल न हो तो क्या होता है?

पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं में एग फ्रीजिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। करियर, शादी में देरी या अन्य व्यक्तिगत कारणों के चलते महिलाएं अपने अंडाणु भविष्य के लिए सुरक्षित करवा रही हैं, ताकि बाद में गर्भधारण में मदद मिल सके।
इस प्रक्रिया में महिला के अंडाणु शरीर से निकालकर बहुत कम तापमान पर सुरक्षित (क्रायोप्रिजर्व) किए जाते हैं।
एग फ्रीजिंग कैसे काम करती है?
प्रजनन चिकित्सा के विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया इस तरह होती है:
- महिला के अंडाणु शरीर से निकाले जाते हैं
- उन्हें लैब में सुरक्षित तरीके से फ्रीज किया जाता है
- कई सालों तक ये अंडाणु सुरक्षित रह सकते हैं
- जरूरत पड़ने पर इन्हें IVF प्रक्रिया के जरिए उपयोग किया जाता है
डॉ सलोनी चड्ढा के अनुसार यह तकनीक आजकल कई निजी अस्पतालों और फर्टिलिटी क्लीनिक में उपलब्ध है।
अगर एग का इस्तेमाल न किया जाए तो क्या होता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि महिला भविष्य में इन अंडाणुओं का उपयोग नहीं करती है तो कुछ विकल्प होते हैं:
1. नष्ट (Discard) करना
महिला लिखित सहमति देकर अपने फ्रीज किए गए अंडाणुओं को नष्ट करवा सकती है।
2. रिसर्च में उपयोग
कुछ मामलों में इन्हें चिकित्सा शोध के लिए उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए भी अनुमति जरूरी होती है।
3. डोनेशन (कुछ देशों में)
कुछ देशों में अंडाणु दान की अनुमति होती है, लेकिन भारत में इसके लिए सख्त नियम लागू हैं।
यह सब प्रक्रियाएं ICMR की गाइडलाइंस के अनुसार नियंत्रित होती हैं।
एग फ्रीजिंग के फायदे
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि महिलाएं अपने प्रजनन विकल्पों को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकती हैं।
- करियर पर ध्यान देने का समय मिलता है
- देर से मातृत्व की योजना संभव होती है
- 40 वर्ष से पहले बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है
- भविष्य में IVF के जरिए गर्भधारण संभव होता है
निष्कर्ष
एग फ्रीजिंग आधुनिक मेडिकल साइंस की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो महिलाओं को प्रजनन से जुड़े फैसलों में अधिक स्वतंत्रता देती है। हालांकि इसके उपयोग, संरक्षण और नष्ट करने के नियम पूरी तरह कानूनी और मेडिकल दिशानिर्देशों पर निर्भर करते हैं।




