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ग्रीन कार्ड के लिए भारतीयों को लौटना पड़ सकता है भारत, H-1B और F-1 वीजा धारकों की बढ़ी चिंता

अमेरिका की इमिग्रेशन एजेंसी USCIS (US Citizenship and Immigration Services) ने एक नया पॉलिसी मेमो जारी कर विदेशी नागरिकों, खासकर भारतीय H-1B और F-1 वीजा धारकों की चिंता बढ़ा दी है। नए निर्देशों के मुताबिक, अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड के लिए “Adjustment of Status” यानी स्टेटस बदलने की प्रक्रिया अब पहले जितनी आसान नहीं रहेगी। कई मामलों में आवेदकों को अमेरिका छोड़कर अपने देश जाकर कांसुलर प्रोसेसिंग के जरिए आवेदन पूरा करना पड़ सकता है।

USCIS का नया नियम क्या है?

USCIS ने साफ किया है कि विदेशी नागरिकों को मौजूदा इमिग्रेशन कानूनों और अदालत के फैसलों के अनुसार, अमेरिका के बाहर से ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यानी भारतीय आवेदकों को भारत लौटकर अमेरिकी दूतावास या कांसुलेट के जरिए आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।

USCIS के प्रवक्ता ज़ैक काहलर ने कहा कि यह कदम इमिग्रेशन सिस्टम को कानून के मूल उद्देश्य के अनुसार चलाने के लिए उठाया गया है। उनका कहना है कि इससे लोग अस्थायी वीजा पर अमेरिका जाकर स्थायी रूप से बसने के लिए कानून की “कमियों” का फायदा नहीं उठा पाएंगे।

भारतीय H-1B प्रोफेशनल्स पर क्या असर पड़ेगा?

इस नए मेमो का सबसे बड़ा असर भारतीय H-1B वर्कर्स पर पड़ सकता है, जो लंबे समय से EB-2 और EB-3 कैटेगरी में ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। पहले H-1B धारक यह मानकर चलते थे कि अगर उनका वीजा स्टेटस वैध है, टैक्स रिकॉर्ड साफ है और सभी जरूरी शर्तें पूरी हैं, तो I-485 आवेदन मंजूर हो जाएगा।

लेकिन अब USCIS अधिकारियों को अधिक विवेकाधिकार दिया गया है। सिर्फ वैध H-1B या L-1 स्टेटस बनाए रखना अब ग्रीन कार्ड मंजूरी के लिए पर्याप्त नहीं माना जाएगा।

F-1 स्टूडेंट्स के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें

इमिग्रेशन विशेषज्ञों के मुताबिक F-1 स्टूडेंट वीजा धारकों के लिए स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है। F-1 वीजा “dual intent” कैटेगरी में नहीं आता। यानी छात्र वीजा लेते समय यह बताते हैं कि पढ़ाई पूरी होने के बाद वे अपने देश लौट जाएंगे।

अब यदि वही छात्र बाद में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं, तो अधिकारी उनके पुराने बयानों और मौजूदा इरादों की तुलना कर सकते हैं। इससे आवेदन की जांच और सख्त हो सकती है।

अधिकारियों के विवेक पर बढ़ी निर्भरता

इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि यह मेमो कानून में बदलाव नहीं करता, लेकिन अधिकारियों के रवैये को बदल सकता है। पहले जहां Adjustment of Status एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती थी, अब अधिकारियों को हर आवेदन में “सकारात्मक कारकों” और आवेदक की व्यक्तिगत परिस्थितियों को अलग से परखने का अधिकार दिया गया है।

ग्रीन कार्ड आवेदन में क्या चीजें करेंगी मदद?

विशेषज्ञों के मुताबिक अब ग्रीन कार्ड आवेदन को मजबूत बनाने के लिए सिर्फ पात्रता काफी नहीं होगी। आवेदकों को अपनी उपलब्धियों और अमेरिका में योगदान को भी विस्तार से दिखाना होगा, जैसे:

  • टैक्स रिकॉर्ड
  • करियर ग्रोथ
  • सामुदायिक भागीदारी
  • पारिवारिक रिश्ते
  • लंबे समय तक वैध स्टेटस बनाए रखना
  • सामाजिक और पेशेवर उपलब्धियां

भारतीय परिवारों के लिए क्या है राहत?

हालांकि लंबे समय से ग्रीन कार्ड वेटिंग में फंसे भारतीय परिवारों के लिए एक सकारात्मक पहलू भी है। USCIS ने “positive equities” यानी सकारात्मक सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को महत्व देने की बात कही है। इससे वे आवेदक फायदा उठा सकते हैं जिन्होंने अमेरिका में लंबे समय तक स्थिर और जिम्मेदार जीवन जिया है।

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