कोविड के बाद युवाओं में बढ़ रही कूल्हे की गंभीर बीमारी, हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी में 40% उछाल

नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी के बाद भारत में युवाओं के बीच कूल्हे (Hip) से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले जहां हिप अर्थराइटिस और एवास्कुलर नेक्रोसिस (AVN) जैसी समस्याएं बुजुर्गों में अधिक देखी जाती थीं, वहीं अब 30 से 40 साल की उम्र के लोग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, देश में हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की मांग में करीब 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि कोविड के दौरान स्टेरॉयड के अधिक इस्तेमाल ने इस समस्या को और बढ़ाया है।
क्या है एवास्कुलर नेक्रोसिस (AVN)?
Avascular Necrosis एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें कूल्हे की हड्डी तक पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं पहुंच पाता। इससे हड्डी के ऊतक धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं, जिसे टिशू लॉस (Tissue Loss) कहा जाता है।
यह बीमारी बेहद दर्दनाक होती है और समय रहते इलाज न होने पर कूल्हे का जोड़ पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकता है।
दिल्ली हिप 360 सम्मेलन में विशेषज्ञों की चेतावनी
नई दिल्ली के क्राउन प्लाजा होटल में आयोजित दूसरे “दिल्ली हिप 360 सम्मेलन” में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि कोविड के बाद कूल्हे के जोड़ों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं।
इस सम्मेलन का आयोजन Delhi Orthopedic Association ने Indian Arthroplasty Association के सहयोग से किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि पहले एवीएन केवल बुजुर्गों या गंभीर चोट के मरीजों में देखा जाता था, लेकिन अब यह बीमारी युवाओं और मध्यम आयु वर्ग में भी तेजी से फैल रही है।
चलना-फिरना तक हो रहा मुश्किल
डॉक्टरों के मुताबिक, कई मरीजों में बीमारी का पता देर से चलता है, जिसके कारण धीरे-धीरे कूल्हे का जोड़ खराब हो जाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों के लिए चलना-फिरना और सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो जाता है।
आखिरकार उन्हें टोटल हिप रिप्लेसमेंट (THR) सर्जरी करवानी पड़ती है।
कोविड के दौरान स्टेरॉयड बना बड़ी वजह
मैक्स अस्पताल, दिल्ली के ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के डायरेक्टर Dr. L Tomar ने बताया कि कोविड महामारी के दौरान स्टेरॉयड ने कई मरीजों की जान बचाई, लेकिन कुछ मामलों में लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल के कारण ऑस्टियोनेक्रोसिस और कूल्हे के जोड़ में गंभीर बदलाव देखने को मिले।
उन्होंने कहा कि अब कम उम्र के मरीज भी गंभीर हिप डैमेज, फीमर हेड के क्षतिग्रस्त होने और गठिया जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।
समय पर पहचान बेहद जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि एवास्कुलर नेक्रोसिस का समय पर पता चल जाए तो जोड़ों को सुरक्षित रखने वाले उपचार संभव हैं और सर्जरी की जरूरत टाली जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय मेडिकल रिसर्च के अनुसार, स्टेरॉयड से होने वाला एवीएन कुछ ही महीनों में विकसित हो सकता है और इसका सबसे ज्यादा असर कूल्हे के जोड़ पर पड़ता है।
युवाओं को किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?
- कूल्हे में लगातार दर्द
- चलने या बैठने में परेशानी
- सीढ़ियां चढ़ने में दर्द
- पैरों में जकड़न
- लंबे समय तक खड़े रहने में दिक्कत
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।




