उत्तर प्रदेश
₹1500 करोड़ खर्च के बाद भी नहरें सूखी, किसानों में भारी नाराज़गी

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पूर्वी गंगा नहर परियोजना को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ₹1500 करोड़ से अधिक बजट खर्च होने के बावजूद नहरों में पानी नहीं पहुंचने पर किसानों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। भीषण गर्मी के बीच नहरें, रजवाहे और माइनर पूरी तरह सूखी पड़ी हैं।
करोड़ों की परियोजना, लेकिन खेतों में पानी नहीं
किसानों और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि:
- पूर्वी गंगा परियोजना पर भारी बजट खर्च हुआ
- इसके बावजूद नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया
- सिंचाई व्यवस्था कागजों तक ही सीमित रह गई है
गर्मी के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं।
किसानों का आरोप: सिर्फ कागजी सफाई और खर्च
किसान संगठनों का कहना है कि:
- हर साल सिल्ट सफाई और मरम्मत के नाम पर करोड़ों खर्च होते हैं
- लेकिन नहरों की हालत ज्यों की त्यों बनी रहती है
- कई जगह नहरों में घास और झाड़ियां तक उगी हुई हैं
किसानों ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बताया है।
सिंचाई विभाग का पक्ष
मुख्य अभियंता (पूर्वी गंगा) शरद कुमार सिंह ने कहा कि:
- हरिद्वार गंगा में वर्तमान में लगभग 12,000 क्यूसेक पानी उपलब्ध है
- किसानों की मांग के अनुसार 1,500 क्यूसेक पानी नहरों में छोड़ने का प्रस्ताव भेजा गया है
- जल्द ही नहरों में पानी छोड़े जाने का प्रयास किया जा रहा है
तकनीकी कारणों का हवाला
सिंचाई विभाग की ओर से बताया गया कि:
- खरीफ सीजन और जल प्रबंधन नियमों का पालन किया जा रहा है
- गंगा में सिल्ट की अधिकता भी एक कारण है
- इसी वजह से कई बार नहरों के गेट बंद रखने पड़ते हैं
किसानों का गुस्सा बढ़ा, आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय किसान नेता दिगंबर सिंह ने चेतावनी दी है कि:
- यदि जल्द पानी नहीं छोड़ा गया तो बड़ा आंदोलन होगा
- मुरादाबाद से बिजनौर तक सिंचाई विभाग के कार्यालयों का घेराव किया जाएगा
- तालाबंदी और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा
प्रशासनिक स्तर पर दबाव बढ़ा
मामले को गंभीरता से लेते हुए:
- स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सिंचाई मंत्री से मुलाकात की
- फसलों को बचाने के लिए तुरंत पानी छोड़ने की मांग की गई
- मंत्री ने अधिकारियों को नहरों में पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं




