लखनऊ के कसमंडी विवाद में तनाव बढ़ा: जमीन और धार्मिक उपयोग को लेकर आमने-सामने आए समुदाय

Lucknow के Kasmandi Kala क्षेत्र को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। जमीन के ऐतिहासिक दावे और धार्मिक गतिविधियों को लेकर दो पक्ष आमने-सामने हैं, जिसके चलते इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
पासी समाज का दावा: ऐतिहासिक विरासत की जमीन
पासी समाज से जुड़े योगेश पासी का दावा है कि यह क्षेत्र महाराजा कंस पासी की विरासत से जुड़ा है और इसी कारण इसका नाम “कसमंडी” पड़ा।
उनका कहना है कि:
- पिछले चार वर्षों से यह मुद्दा उठाया जा रहा है
- इस जमीन पर गलत तरीके से धार्मिक गतिविधियां की जा रही हैं
- प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
विवादित बयान और चेतावनी
योगेश पासी ने कहा कि यदि बकरीद के दौरान वहां कुर्बानी दी गई तो विरोध स्वरूप “सूअर की बलि” देने की बात कही जाएगी।
साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि पासी समाज इस मामले को कोर्ट में ले जाएगा।
धार्मिक गतिविधियों को लेकर टकराव
स्थानीय स्तर पर हिंदू संगठनों ने भी इस स्थल पर पूजा-पाठ किया, जिससे तनाव और बढ़ गया।
Akhil Bharat Hindu Mahasabha के कार्यकर्ताओं ने मौके पर सांकेतिक पूजा की और मांग की कि इसे मंदिर घोषित किया जाए।
प्रशासन ने विवादित स्थल पर बकरीद की नमाज को लेकर रोक लगा दी है।
पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था
Uttar Pradesh Police ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात की है।
- बैरिकेडिंग की गई
- संगठनों को मौके पर जाने से रोका गया
- कई जगहों पर समझा-बुझाकर लोगों को शांत कराया गया
दोनों पक्षों का दावा और बढ़ता तनाव
- एक पक्ष इसे धार्मिक स्थल और पूजा का स्थान बता रहा है
- दूसरा पक्ष इसे ऐतिहासिक विरासत की जमीन बताते हुए अधिकार की मांग कर रहा है
प्रशासन की रोक के बावजूद दोनों पक्षों के बयान और गतिविधियों से तनाव बढ़ता दिख रहा है।
प्रशासन की स्थिति
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, लेकिन इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।



