SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इमरान मसूद का हमला, बोले- “चुनाव के बाद

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार से शुरू हुई वोटर लिस्ट की SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दिए जाने के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद ने कहा कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है, लेकिन इसके इस्तेमाल के तरीके को लेकर चिंता बढ़ रही है।
“पहले वोट काटते हैं, फिर अपील में बहाल करते हैं”
इमरान मसूद ने कहा कि कई मामलों में पहले लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाते हैं और बाद में उनकी अपील लंबित रखी जाती है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा,
“अगर किसी व्यक्ति का वोट देने का अधिकार चुनाव के बाद बहाल होता है, तो फिर उस चुनाव की वैधता पर सवाल क्यों नहीं उठेगा?”
“अब और वोट क्यों काटे जाएंगे?”
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंतिम वोटर लिस्ट जारी हो चुकी है। ऐसे में अब नए आधार पर वोट काटने की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि अगर गलत या फर्जी फॉर्म जमा किए जाते हैं, तो उनका इस्तेमाल लोगों के वोट हटाने के लिए किया जा सकता है, जबकि प्रभावित व्यक्ति अपील प्रक्रिया में उलझे रह जाते हैं।
हलफनामे वाला प्रावधान लाने की मांग
कांग्रेस सांसद ने सुझाव दिया कि वोटर लिस्ट से जुड़े फॉर्म हलफनामे के साथ जमा कराए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर फॉर्म जमा करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उनके मुताबिक इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़ा कम होगा।
“घुसपैठियों का मुद्दा उठाते हैं तो जवाब भी दें”
इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस इस बात के पक्ष में है कि किसी भी विदेशी नागरिक या घुसपैठिए का नाम वोटर लिस्ट में नहीं होना चाहिए।
हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि घुसपैठिए जनसंख्या का स्वरूप बदल रहे हैं, तो फिर इतने वर्षों में उनकी पहचान और कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।
SIR को लेकर सियासत तेज
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। विपक्ष जहां चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार और आयोग इसे वोटर लिस्ट को शुद्ध करने की जरूरी कवायद बता रहे हैं।




