पुणे में NDA की 150वीं पासिंग आउट परेड, 353 कैडेट्स बने भारतीय सशस्त्र बलों का हिस्सा

पुणे (खड़कवासला): राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की 150वीं पासिंग आउट परेड शनिवार को भव्य समारोह के साथ संपन्न हुई। यह आयोजन खड़कवासला स्थित खेतरपाल परेड ग्राउंड में हुआ, जहां भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड की समीक्षा की।
इस अवसर पर कुल 353 कैडेट्स ने एनडीए से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।
18 महिला कैडेट्स समेत 353 कैडेट्स हुए पास आउट
इस बैच में 18 महिला कैडेट्स और 12 मित्र देशों के 24 विदेशी कैडेट्स भी शामिल थे। यह परेड भारतीय सेना की संयुक्त प्रशिक्षण प्रणाली और वैश्विक सहयोग की भावना को भी दर्शाती है।
सेना प्रमुख का भावनात्मक संबोधन
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनके लिए भावनात्मक क्षण है क्योंकि 42 वर्ष पहले वे स्वयं इसी परेड ग्राउंड से पास आउट हुए थे।
उन्होंने कहा कि एनडीए केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि यह राष्ट्रसेवा के मूल्यों को जीवनभर निभाने वाली एक परंपरा है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र
अपने संबोधन में सेना प्रमुख ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में खतरे केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं हैं।
उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान ने यह साबित किया है कि भारत किसी भी चुनौती का जवाब सटीकता, समन्वय और मजबूत संकल्प के साथ देने में सक्षम है।
एक अच्छे अधिकारी के तीन गुण
जनरल द्विवेदी ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए एक सफल सैन्य अधिकारी के तीन महत्वपूर्ण गुण बताए:
- एटीट्यूड (Attitude) – सकारात्मक सोच और आंतरिक मजबूती
- एडाप्टेबिलिटी (Adaptability) – बदलते हालात में खुद को ढालने की क्षमता
- एबिलिटी (Ability) – कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की योग्यता
‘युद्ध जेंडर न्यूट्रल होता है’
सेना प्रमुख ने महिला कैडेट्स की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने हर मानक को पूरा किया है और किसी भी तरह से पुरुष कैडेट्स से पीछे नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “आने वाले युद्धों में साहस, क्षमता और संकल्प का कोई लिंग नहीं होता। युद्ध हमेशा जेंडर न्यूट्रल होता है।”
विदेशी कैडेट्स को भी सराहना
परेड में शामिल विदेशी कैडेट्स की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि NDA में मिला साझा प्रशिक्षण विभिन्न देशों के बीच मित्रता और सहयोग को मजबूत करेगा।
परिवार और प्रशिक्षकों की भूमिका को सराहा
सेना प्रमुख ने कैडेट्स के परिवारों और प्रशिक्षकों को भी धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी मेहनत और त्याग के बिना यह सफलता संभव नहीं थी।
उन्होंने अंत में NDA के आदर्श वाक्य “सेवा परमो धर्मः” का उल्लेख करते हुए कहा कि नए अधिकारी देश की सेवा को सर्वोपरि रखें।




