देश-विदेश

अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते में मिस्र की एंट्री, राष्ट्रपति सीसी ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका

काहिरा/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता (Nuclear Deal Talks) को लेकर एक नया और अहम मोड़ सामने आया है। जहां पाकिस्तान का नाम लगातार संभावित मध्यस्थ के तौर पर चर्चा में रहा है, वहीं अब मिस्र ने खुलकर स्वीकार किया है कि वह दोनों देशों के बीच शांति समझौता कराने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत के दौरान इस बात की पुष्टि की कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक समझौते को संभव बनाने के लिए विभिन्न पक्षों के संपर्क में है।

अमेरिका-ईरान समझौते के लिए सक्रिय है मिस्र

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, राष्ट्रपति अल-सीसी ने कहा कि मिस्र क्षेत्रीय तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि मिस्र का रुख अंतरराष्ट्रीय कानून, देशों की संप्रभुता और उनके संसाधनों के सम्मान पर आधारित है।

अल-सीसी ने स्पष्ट किया कि उनका देश सभी संबंधित पक्षों के साथ गहन संपर्क बनाए हुए है ताकि अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी और व्यापक समझौता हो सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहना चाहिए: मैक्रों

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बातचीत के दौरान कहा कि फ्रांस मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करने और क्षेत्र को अस्थिरता से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मैक्रों ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की निर्बाध आवाजाही बेहद जरूरी है।

ट्रंप बोले- समझौते के बेहद करीब हैं अमेरिका और ईरान

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान परमाणु समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बातचीत विफल होती है तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रहेगा।

फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।

उन्होंने कहा, “हम एक बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं। अगर समझौता हो जाता है तो यह सबसे बेहतर विकल्प होगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो सैन्य विकल्प पर भी विचार किया जाएगा।”

ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का दिया आश्वासन

ट्रंप के मुताबिक, ईरान ऐसी शर्तों पर सहमत हुआ है जिनके तहत वह न तो परमाणु हथियार विकसित करेगा और न ही किसी अन्य देश से खरीदेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वार्ता आसान नहीं है और दोनों पक्षों के बीच कड़ी बातचीत चल रही है, लेकिन धीरे-धीरे सकारात्मक प्रगति हो रही है।

उन्होंने कहा, “वे बहुत सख्त बातचीत करने वाले हैं। इसमें समय लगता है, लेकिन हमें लगता है कि हम अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं।”

पाकिस्तान की भूमिका पर भी बनी हुई है नजर

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी चर्चा जारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर लगातार ईरानी नेतृत्व के संपर्क में हैं। कई मौकों पर डोनाल्ड ट्रंप भी दोनों नेताओं की सार्वजनिक रूप से सराहना कर चुके हैं।

हालांकि मौजूदा घटनाक्रम से यह साफ संकेत मिल रहा है कि मिस्र भी क्षेत्रीय कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और अमेरिका-ईरान समझौते को आगे बढ़ाने के प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल है।

Related Articles

Back to top button