उत्तर प्रदेश

बिजनौर में गंगा कटाव रोकने के लिए योगी सरकार की बड़ी पहल

बिजनौर: उत्तर प्रदेश में मानसून से पहले बाढ़ और गंगा नदी के कटाव को रोकने के लिए योगी सरकार ने बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। बिजनौर जिले में सिंचाई विभाग पारंपरिक पत्थरों और बोल्डर की जगह अब अत्याधुनिक ACBM (Articulated Concrete Block Mattress) तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य गंगा किनारे बसे 40 से अधिक संवेदनशील गांवों और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को कटाव और बाढ़ से सुरक्षित करना है।

1060 मीटर लंबे तटबंध पर चल रहा काम

सिंचाई विभाग के मध्य गंगा खंड-5 के अधिशासी अभियंता के.पी. सिंह के अनुसार, मध्य गंगा बैराज के बाएं अफ्लैक्स तटबंध (LAB) पर लगभग 1060 मीटर क्षेत्र में सुरक्षा कार्य तेजी से किया जा रहा है।

पिछले वर्ष मानसून के दौरान गंगा की तेज धारा से लगभग 40 साल पुराना तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे आसपास के गांवों में बाढ़ और कटाव का गंभीर खतरा पैदा हो गया था।

100 करोड़ की लागत से लागू हो रही आधुनिक तकनीक

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सिंचाई मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने वरिष्ठ इंजीनियरों के साथ समीक्षा कर इस परियोजना को मंजूरी दी।

करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यह विदेशी तकनीक आधारित सुरक्षा कार्य कराया जा रहा है, जिससे हर साल होने वाले कटाव और बाढ़ के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

क्या है ACBM तकनीक?

सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता संदीप कुमार के अनुसार, ACBM एक आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक है जिसमें भारी कंक्रीट ब्लॉकों को नायलॉन रस्सियों और स्टेनलेस स्टील वायर की मदद से जोड़कर जियोफैब्रिक टेक्सटाइल पर मजबूत मैट्रेस तैयार किया जाता है।

यह संरचना नदी के तेज बहाव को सहन करने और तटबंध की सुरक्षा के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।

पारंपरिक तरीकों से क्यों बेहतर है ACBM?

पारंपरिक पत्थर और बोल्डर तकनीक में तेज बहाव के कारण मिट्टी खिसकने पर तटबंध टूटने का खतरा रहता है। लेकिन ACBM तकनीक में:

  • ब्लॉक आपस में मजबूती से जुड़े रहते हैं
  • पानी के दबाव में भी संरचना स्थिर रहती है
  • कटाव की स्थिति में यह ढांचा खुद को ढाल लेता है
  • नदी के बहाव की दिशा के अनुसार एडजस्ट हो जाता है

इससे मुख्य बांध टूटने का खतरा काफी कम हो जाता है।

पानी की गति को करता है नियंत्रित

ACBM तकनीक नदी के तेज बहाव की गति को कम करती है और किनारों पर पड़ने वाले सीधे दबाव को नियंत्रित करती है। इससे आसपास की कृषि भूमि और गांवों को नुकसान होने की संभावना घट जाती है।

40 से अधिक गांवों को मिलेगा सुरक्षा कवच

इस परियोजना से गंगा किनारे बसे 40 से अधिक संवेदनशील गांवों और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को बाढ़ और कटाव से सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में नदी किनारे सुरक्षा कार्यों के लिए मॉडल साबित हो सकती है।

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